Dhurandhar Story Explained: धुरंधर की कहानी कितनी हकीकत कितना फसाना, दर्शकों में इतनी दीवानगी क्यों? समझिए विस्तार से

Dhurandhar Story Explained: धुरंधर की कहानी कितनी हकीकत कितना फसाना, दर्शकों में इतनी दीवानगी क्यों? समझिए विस्तार से

Dhurandhar The Revenge: आदित्य धर निर्देशित धुरंधर के क्रेज को समझने के लिए फिल्म के दो डायलॉग्स पर गौर कीजिए. पहले पार्ट में- "ये नए दौर का हिंदुस्तान है, ये घर में घुसेगा भी और मारेगा भी." दूसरे पार्ट में- "पाकिस्तान का मुस्तकबिल अब भारत तय करेगा." इस तरह रणवीर सिंह की यह फिल्म युवाओं के भीतर एक नया राष्ट्रवादी जज्बा विकसित कर रही है.

रणवीर सिंह की धुरंधर 2 ने सिनेमा घरों में दस्तक दे दी है. आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज है. पेड प्रीव्यू शो देखने के बाद प्रतिक्रियाओं से फिल्म को लेकर फिर से जोश हाई है. राम गोपाल वर्मा जैसे फिल्ममेकर भी इसके मुरीद हो गए हैं. उन्होंने इसे शोले और मुगले आजम से भी बड़ी फिल्म करार दिया है. करीब चार घंटे की फिल्म के प्रदर्शन के लिए मुंबई, पुणे जैसे कुछ शहरों के थिएटर्स चौबीस घंटे खोल कर रखने पड़ हैं. इतिहास में संभवत: ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है. यहां तक कि मुंबई के मराठा मंदिर में 31 साल से चल रही दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे के मॉर्निंग शो की टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है.

अक्षय खन्ना, संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी, सारा अर्जुन के रोल देख सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर माहौल बना हुआ है.इसी माहौल में करीब तीन महीने में धुरंधर का दूसरा पार्ट भी आया. लेकिन इसकी मूल कहानी को लेकर कई तरह के सवाल और संशय हैं. कहानी हकीकत के करीब है या केवल कुछ बड़ी घटनाओं को जोड़कर उसे फैंटेसी का रूपक दिया गया है? फिल्म हिंसा और खून खराबे से लथपथ है लेकिन दर्शकों में इसे देखने की दीवानगी है. इससे पहले भी अनेक हिंदी फिल्मों में पाकिस्तान और आतंकवाद को दिखाया गया है लेकिन धुरंधर उन सबसे कितनी अलग है, ये सबकुछ विस्तार से जानने की जरूरत है.

दर्शकों का बड़ा वर्ग धुरंधर को सच मानता है

भारतीय दर्शकों का एक बड़ा वर्ग धुरंधर में दिखाई गई कहानी को पूरी तरह से सच मान रहा है़. भारी संख्या में दर्शक सिनेमा घरों की ओर रुख कर रहे हैं. धुरंधर का पहला भाग जब आया तो ज्यादातर दर्शकों ने कहा कि फिल्म में सचाई को दिखाया गया है. इसके कई किरदार और प्रसंग भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव से जुड़े हैं. लेकिन इसमें कितनी सचाई है. फिल्म में कितनी हकीकत दिखाई गई है और कितना फसाना रचा गया है.

गौरतलब है कि फिल्म का पहला भाग आने से पहले सवाल उठाया गया था क्या रणवीर सिंह का किरदार हमजा अली उर्फ जसकीरत सिंह रांगी शहीद मेजर मोहित शर्मा की लाइफ पर आधारित है? शहीद मोहित शर्मा के परिवार वालों ने कोर्ट का भी रुख किया लेकिन इसके बादफिल्म से जुड़ी टीम ने साफ किया कि रणवीर सिंह का किरदार अलग है. इसके बाद ये मामला थम गया. जब फिल्म थिएटर में आई तो डिस्क्लेमर में भी इसे परिभाषित किया गया. आम तौर पर किसी भी डिस्क्लेमर में कहानी, किरदार और प्रसंग को मनोरंजन के लिए काल्पनिक बताने का रिवाज है साथ ही यह भी जोड़ा जाता है कि इसका वास्तविकता से मिलान महज संयोग हो सकता है. इस आधार पर पहली नजर में फिल्मकार के दावे को ही सच माना जा सकता है.

विमान हाईजैक और भारत माता की जय

ये संयोग की ही बात है कि धुरंधर में दिखाई गई कई घटनाएं, किरदार, प्रसंग और संवाद सच के करीब ठहरते हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध, कश्मीर को लेकर बरसों से जारी तनाव, दिल्ली में संसद और मुंबई में ताज पर आतंकवादी हमले, भारत के अंदर नकली नोटों की सप्लाई आदि को फिल्म में जिस तरह से दिखाया गया है, वह निराधार नहीं है.

पहले पार्ट की शुरुआत के कुछ प्रसंगों को याद कीजिए. जब कांधार विमान अपहरण को दिखाया गया था, साथ ही विमान के अंदर भारत माता की जय वाला प्रसंग भी आया था. आईबी प्रमुख अजय सान्याल (आर माधवन) भारतीय यात्रियों से भारत माता की जय संबोधित करते हैं लेकिन खौफ के चलते खामोशी छा जाती है. इस वाकये को अजीत डोभाल ने भी एक बातचीत में बयां किया था, जो कि दिसंबर 1999 के कंधार हाईजैक के दौरान भारत सरकार के मुख्य वार्ताकार थे. उन्होंने माना था कि आतंकियों के भय से लोगों ने खामोशी बरती.

Dhurandhar Film

रणवीर सिंह

संसद पर हमला और महिला कांस्टेबल

इसी तरह संसद पर हमले वाले सीन को भी देखिए. फिल्म में एक महिला कांस्टेबल द्वारा आतंकियों की कार को रोकते हुए दिखाया गया था. आतंकियों ने उस महिला पुलिस को गोलियों से भून दिया. यह वाकया भी सच्ची घटना का फिल्मांकन है. 13 दिसंबर, 2001 को जब आतंकवादियों ने संसद पर हमला किया था तब उनकी गोलियों से जिस महिला कांस्टेबल की मौत हो गई थी, उसका वास्तविक नाम कमलेश कुमारी यादव था. कमलेश कुमारी ने ही सबसे पहले संसद में आतंकियों के घुसने की खबर दी थी और बड़ी बहादुरी के साथ उसे रोकने की कोशिश की थी.

फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है. हमजा अली पाकिस्तान के अंदर कराची के ल्यारी की दुनिया से रूबरू होता है. बलूच नेता और ल्यारी का गैंगस्टर रहमान डकैत, एसपी असलम चौधरी, कराची का लीडर जमील जमाली, मेजर इकबाल बने अर्जुन रामपाल का डायलॉग आदि भी फिल्म की सचाई का हिस्सा हैं. रहमान डकैत के बारे में हम पहले ही काफी चर्चा कर चुके हैं. पर्दे पर उसे ग्लैमराइज्ड और ग्लोरीफायड करके भी दिखाया है, लेकिन फिल्म में पाकिस्तान के जिस पीरियड की कहानी दिखाई गई है, उस दौरान के अखबारों के पन्ने पलटें तो रहमान डकैत को स्थानीय लोगों के नजरिए से एक मसीहा माना गया था.

नकली नोट का नेटवर्क और खनानी ब्रदर्स

हालांकि फिल्म के अंदर भारत विरोध में रहमान डकैत और आईएसआई के मेजर इकबाल के बीच जिस तरह से डील को दिखाया गया है, उसकी बुनियाद को भी झुठलाया नहीं जा सकता. याद कीजिए फिल्म में पाकिस्तान के खनानी ब्रदर्स को नकली नोटों का रैकेट, उसका छापाखाना भी दिखाया जाता है. उसका गैंग नकली नोटों का जखीरा भारत भेजने का आरोपी है. खनानी ब्रदर्स ल्यारी गैंग ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी समर्थित दूसरे आतंकी संगठनों को भी फंड करने के लिए जाना गया है. फिल्म के अंदर खनानी ब्रदर्स का पूरा नाम भले ही नहीं बताया गया लेकिन वास्तव में ये दोनों भाई हैं. एक का नाम है अल्ताफ खनानी और दूसरे का नाम था- जावेद खनानी. उस दौर में भारत के अंदर फेक करंसी का नेटवर्क फैलाने में खनानी ब्रदर्स का बड़ा हाथ माना जाता है.

फिल्म के अंदर मेजर इकबाल बने अर्जुन रामपाल का एक डायलॉग काफी चर्चित हुआ था. वह डायलॉग वास्तव में जनरल जिलाउल हक का बोला हुआ था- ब्लीड इंडिया विथ अ थाउजेंड कट्स. जिलाउल हक ने 1971 की जंग हारने के बाद यह कहा था, जिसे मेजर इकबाल दुहराता है और उसे फॉलो करता है. पाकिस्तान आर्मी ने भी इसे अपने मिशन में शामिल किया.

असलम चौधरी से लेकर पाक हैंडलर तक

फिल्म में जिस एसपी असलम चौधरी के रोल को संजय दत्त ने निभाया है, वह भी वास्तविक है. इसका नाम भी नहीं बदला गया है. बल्कि संजय दत्त का गेटअप और लुक वास्तविक चौधरी असलम खान जैसा ही रखा गया है. गुगल इमेज पर वास्तविक असलम चौधरी की फोटो खोजें और फिर संजय दत्त के गेटअप से उसका मिलान करें- दोनों मिलते जुलते दिखाई देंगे. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट असलम चौधरी ने ल्यारी में वास्तविक तौर पर ऑपरेशन रहमान डकैत अभियान चलाया था. उसी ने ल्यारी गैंग का खात्मा किया था.

एसपी असलम चौधरी के अलावा राकेश बेदी ने जिस जमील जमाली का रोल निभाया है, उसका गेटअप भी ल्यारी के रियल लाइफ लीडर नबील गाबोल के बेहद करीब है. वास्तविक तौर पर उसकी पार्टी को रहमान डकैत के गैंग ने सपोर्ट किया था. चूंकि फिल्म की कहानी तकरीबन साल 2008 से 2010 के बीच की है, लिहाजा इस दौरान भारत के अंदर हुए आतंकवादी हमले भी दिखाये गये हैं. फिल्म में 26/11 के मुंबई ताज अटैक को भी दिखाया गया है. फिल्म इस बात की तस्दीक करने का प्रयास करती है कि पाकिस्तान में बैठा हैंडलर टीवी पर खबरें देखकर ताज हमले में शामिल आतंकियों को गाइड कर रहा है. यह सच्ची घटना है.

Dhurandhar Film Sanjay Dutt

संजय दत्त

भारत तय करेगा पाकिस्तान का मुस्तकबिल

अब अहम सवाल ये हो जाता है कि जो बातें मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया रिपोर्ट्स में दर्ज हैं, महज उसके फिल्मांकन देखने जाने के लिए ही दर्शकों में इतनी दीवानगी है? तो इसका जवाब होगा- नहीं. धुरंधर केवल मीडिया रिपोर्ट्स की कहानी नहीं है. फिल्मकार ने यहां अजय सान्याल और हमजा अली जैसे काल्पनिक किरदारों को गढ़ कर एक विशिष्ठ पटकथा तैयार की, जिसमें वास्तविक घटनाओं के प्रसंगों को एक सूत्र में पिरोया और उसे एक्शन, एडवेंचर और इमोशन के साथ बदला लेने वाली एपिक शैली में पेश किया. इससे फिल्म की रोचकता बढ़ गई.

पहले पार्ट के अंत में कहा गया था कि ये नए दौर का हिंदुस्तान है, ये घर में घुसेगा भी और मारेगा भी. तो दूसरे पार्ट का एक डायलॉग है- पाकिस्तान का मुस्तकबिल अब भारत तय करेगा. यानी यह केवल फिल्म नहीं बल्कि पाकिस्तान को दुनिया के मंच पर बेनकाब करने वाला भारत के एक अभियान का हिस्सा है. फिल्म के इस मैसेज ने भारतीय दर्शकों में जोश हाई कर दिया है. फिल्म ने एक नई राष्ट्रवादी चेतना विकसित करने में कामयाबी हासिल की. आर माधवन के मिशन और रणवीर सिंह की जांबाजी से पाकिस्तान को जो सबक सिखाई जाती है, उसने हर भारतीय के भीतर आतंकवाद का बदला लेने वाले इमोशन से भर दिया है.

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