Manjummel Boys: ‘मंजुम्मेल ब्वॉयज’ डायरेक्टर चिदंबरम को यौन उत्पीड़न मामले में मिली अंतरिम बेल, कोर्ट ने रखी ये शर्तें
Director Chidambaram Granted Bail: मलयालम फिल्म 'मंजुम्मेल बॉयज' के निर्देशक चिदंबरम एस. पोडुवल इन दिनों खासी सुर्खियों में हैं. डायरेक्टर को यौन उत्पीड़न के मामले में अंतरिम जमानत मिल गई है.
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को जितना उसके बेहतरीन कहनियों के लिए जाना जाता है, उतना ही सुर्खियां कई गलत कारणों के लिए भी ये इंडस्ट्री बटोरती है. इस फिल्म इंडस्ट्री ने बीते सालों में एक से एक शानदार फिल्में दी हैं. इसी बीच मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नामों पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं. इन्हीं में से एक नाम है ‘मंजुम्मेल बॉयज’ जैसी शानदार सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म के निर्देशक चिदंबरम एस. पोडुवल का.
निर्देशक चिदंबरम को 7 मार्च को एर्नाकुलम जिला और सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई है. यह जमानत मई 2022 में हुई एक घटना के बाद दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत के आधार पर दी गई है.
क्या था मामला?
कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें चिदंबरम को जांच में सहयोग करना, सबूतों से छेड़छाड़ न करना और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास न करना शामिल है. शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर एर्नाकुलम दक्षिण पुलिस स्टेशन में 28 फरवरी को मामला दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता एक्ट्रेस ने दावा किया था कि डायरेक्टर ने 2022 में कोच्चि के एक अपार्टमेंट में उनके साथ दुर्व्यवहार किया था. अधिकारियों ने निर्देशक पर बीएनएस की धारा 74 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया था.
कोर्ट ने मामले पर क्या कहा?
चिदंबरम की जमानत याचिका 3 मार्च को दाखिल की गई थी और अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी मुलाकात शिकायतकर्ता से फिल्म ‘मंजुम्मेल बॉयज’ के निर्माण के दौरान हुई थी, जहां उन्हें एक भूमिका के लिए चुना जा रहा था. उन्होंने दावा किया कि उनका व्यवहार प्रोफेशनल था और आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने उनके मान सम्मान को धूमिल करने के लिए ये केस किया है. एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए एक रील पोस्ट की थी और उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में उसके खिलाफ हर्जाने का मुकदमा दायर किया था.
कोर्ट ने कहा कि घटना साल 2022 में हुई थी. याचिका दायर करने में चार साल की देरी हुई है. अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें शिकायतकर्ता को किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोई भी मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया गया था. अदालत ने चिदंबरम को पुलिस जांच में सहयोग करने का भी आदेश दिया है.



