The Taj Story OTT: कहानी बड़ी, असर छोटा… विवादों में रही ‘द ताज स्टोरी’, OTT पर भी दर्शकों के लिए तरसी फिल्म, किस प्लेटफॉर्म पर मौजूद?

The Taj Story OTT: कहानी बड़ी, असर छोटा… विवादों में रही ‘द ताज स्टोरी’, OTT पर भी दर्शकों के लिए तरसी फिल्म, किस प्लेटफॉर्म पर मौजूद?

The Taj Story OTT: काफी विवादों और चर्चाओं के बाद फिल्म 'द ताज स्टोरी' अब ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है. लेकिन जिस फिल्म को लेकर पहले काफी बहस हुई थी, वही फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई. कई लोगों का कहना है कि कहानी में दम होने के बावजूद फिल्म का ट्रीटमेंट कमजोर लग रहा है.

The Taj Story OTT: काफी समय से विवादों और बहसों में घिरी फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ आखिरकार अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है. थिएटर रिलीज के दौरान जिस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा हो रही थी, वही फिल्म जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो दर्शकों की रिएक्शन उम्मीद से काफी ठंडी नजर आई. कई लोगों ने इसे देखने के बाद निराशा जाहिर की और कहा कि फिल्म जिस बड़े मुद्दे और बहस को उठाने का दावा करती है, वो स्क्रीन पर उतनी मजबूती से सामने नहीं आ पाई.

‘द ताज स्टोरी’ फिल्म की कहानी ऐतिहासिक बहस से जुड़े उस विवादित दावे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें कहा जाता है कि ताज महल पहले एक हिंदू मंदिर ‘तेजो महालय’ था. इसी थ्योरी को आधार बनाकर फिल्म में कोर्टरूम ड्रामा और इतिहास से जुड़ी दलीलों को दिखाने की कोशिश की गई है. इस संवेदनशील विषय की वजह से फिल्म शुरुआत से ही विवादों में रही और कई लोगों ने इसे इतिहास की गलत व्याख्या बताकर आलोचना की. ये फिल्म अमेजन प्राइम पर मौजूद है.

फिल्म का प्लॉट कमजोर

फिल्म में दिग्गज एक्टर परेश रावल लीड रोल में नजर आते हैं और उनकी एक्टिंग को कई दर्शकों ने सराहा भी है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि मजबूत कलाकार होने के बावजूद फिल्म की स्क्रिप्ट और ट्रीटमेंट उतना असर नहीं छोड़ पाए. कई समीक्षकों ने माना कि कहानी में दम होने के बावजूद फिल्म कमजोर है और यही इसकी सबसे बड़ी कमी बनकर सामने आया. ओटीटी पर रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिले-जुले रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं.

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बिखरी हुई लगी फिल्म

कुछ दर्शकों का मानना है कि फिल्म एक दिलचस्प बहस छेड़ती है और अलग नजरिया पेश करती है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों का कहना है कि फिल्म बहुत लंबी और बिखरी हुई लगती है, जिससे इसे आखिरी तक देखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. दर्शकों ने ये भी कहा कि फिल्म में कई ऐसे सीन और सबप्लॉट हैं जो कहानी को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर कर देते हैं. फिल्म के ट्रेलर और पोस्टर को लेकर भी पहले काफी विवाद हुआ था, जब एक पोस्टर में ताजमहल के ऊपर शिवलिंग का प्रतीक दिखाए जाने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी.

उम्मीद पर खरी नहीं उतरी

बाद में मेकर्स को सफाई देनी पड़ी कि फिल्म किसी धार्मिक दावे को प्रमाणित करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि सिर्फ एक विचार और बहस को कहानी के रूप में पेश करती है. जिस फिल्म ने रिलीज से पहले खूब सुर्खियां बटोरी थीं, वही ओटीटी पर आने के बाद दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई. विवादों और चर्चाओं के बावजूद ‘द ताज स्टोरी’ दर्शकों को उतना प्रभावित नहीं कर सकी, जितनी चर्चा इसके नाम को लेकर पहले से हो रही थी.