चीन के साथ भारत को नरक क्यों बता रहे ट्रंप? इस कारण खुन्नस में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

चीन के साथ भारत को नरक क्यों बता रहे ट्रंप? इस कारण खुन्नस में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादित पोस्ट शेयर किया, जिसमें भारत और चीन को हेलहोल कहा गया, जिससे बहस छिड़ गई. यह बयान बर्थराइट नागरिकता और बढ़ती आबादी से जुड़ा है. अमेरिका में भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ी है और उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत मानी जाती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें भारत और चीन को हेलहोल यानी नरक जैसा बताया गया है. यह पोस्ट कंजरवेटिव पॉडकास्ट होस्ट माइकल सैवेज की थी. पोस्ट में अमेरिका के बर्थराइट सिटिजनशिप यानी जन्म के आधार पर नागरिकता देने वाले कानून की आलोचना की गई है. साथ ही कहा गया है कि अमेरिका में भाषा और पहचान बदल रही है.

पोस्ट में कहा गया कि, ‘प्रवासी जन्म के आधार पर अपने बच्चों को नागरिकता दिलाते हैं. इसके बाद वह अपने परिवार को भारत, चीन या किसी हेलहोल जैसे देश से अमेरिका बुला लेते हैं. अब यहां अंग्रेजी भी नहीं बोली जाती है.’ ट्रंप और उनके समर्थक इस नियम का विरोध करते हैं और चाहते हैं कि इसे बदला जाए. उनका मानना है कि नागरिकता देने का फैसला अदालतों या वकीलों के बजाय देश की जनता के वोट से होना चाहिए. आइए जानते हैं भारतीयों के खिलाफ गुस्से की वजह क्या है…

US में बढ़ती भारतीय आबादी

इस मुद्दे के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका में बढ़ती भारतीय आबादी भी मानी जा रही है. US सेंसस ब्यूरो के अनुमान के मुताबिक, 2023 में अमेरिका में लगभग 52 लाख लोगों ने खुद की पहचान भारतीय बताई है. प्यू रिसर्च सेंटर की मई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकी वहां दूसरी सबसे बड़ी एशियाई आबादी हैं और कुल एशियाई आबादी का करीब 21% हिस्सा इन्हीं लोगों से बनता है. भारतीय मूल के लोगों में वे लोग शामिल हैं, जो भारत से अमेरिका गए हैं. साथ ही वे भी जो अमेरिका या किसी अन्य देश में जन्मे हैं, लेकिन खुद को भारतीय मानते हैं.

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23 साल में 174% बढ़ी भारतीय आबादी

अगर पिछले 20 सालों की बात करें तो भारतीय आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है. प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, साल 2000 में यह संख्या करीब 18 लाख थी, जो बढ़कर 2023 में लगभग 49 लाख हो गई. यानी इसमें करीब 174% की बढ़ोतरी हुई है. इनमें से करीब 66% लोग ऐसे हैं, जो दूसरे देशों से आकर अमेरिका में बसे हैं.

हालांकि 2000 में यह आंकड़ा 73% था, यानी अब अमेरिका में जन्मे भारतीय मूल के लोगों की संख्या भी बढ़ रही है. इसी दौरान भारतीय प्रवासियों की संख्या 13 लाख से बढ़कर 32 लाख हो गई है. इसके अलावा करीब 60% भारतीय प्रवासी 10 साल से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं और लगभग 51% लोग वहां की नागरिकता भी ले चुके हैं.

कौन सी भाषा बोलते हैं भारतीय?

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की स्थिति कई मामलों में मजबूत है. 5 साल से ऊपर के 84% भारतीय अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं. इनमें 28% घर में सिर्फ अंग्रेजी बोलते हैं, जबकि 56% दूसरी भाषा बोलते हुए भी अंग्रेजी अच्छे से जानते हैं. घर में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में हिंदी (18%), तेलुगु (11%), गुजराती (10%) और तमिल (7%) शामिल हैं.

कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतीय

करीब 20% भारतीय (9.6 लाख) कैलिफोर्निया में रहते हैं. इसके अलावा टेक्सास (5.7 लाख), न्यू जर्सी (4.4 लाख), न्यूयॉर्क (3.9 लाख) और इलिनोइस (2.70 लाख) में भी बड़ी संख्या है. बड़े शहरों में न्यूयॉर्क, डलास और सैन फ्रांसिस्को प्रमुख हैं. भारतीयों की औसत उम्र 34.2 साल है. प्रवासियों की औसत उम्र 40.9 साल है, जबकि अमेरिका में जन्मे भारतीयों की औसत उम्र 13.4 साल है. शिक्षा के मामले में 25 साल से ऊपर के 77% भारतीयों के पास ग्रेजुएशन या उससे ऊपर की डिग्री है.

70% भारतीय शादीशुदा

करीब 70% भारतीय वयस्क शादीशुदा हैं. 15 से 44 साल की 6% महिलाओं ने पिछले एक साल में बच्चे को जन्म दिया. भारतीय परिवारों की औसत सालाना आय 1,51,200 डॉलर है, जो एशियाई औसत से ज्यादा है. करीब 6% भारतीय गरीबी में रहते हैं. 62% भारतीयों के पास खुद का घर है. धर्म के अनुसार, 48% हिंदू, 15% ईसाई और 15% लोग किसी धर्म से जुड़े नहीं हैं.

जन्मजात नागरिकता का मामला कोर्ट में

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती है. 1865 में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई. इसके मुताबिक, देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं. ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को आदेश जारी कर जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर रोक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर अमेरिका की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई जारी है.

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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
शुभेंदु प्रताप भूमंडल

नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग में 4 साल का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. हिंदी कंटेंट और वीडियो स्क्रिप्ट राइटिंग का अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.

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