The Voice Of Hind Rajab: गाजा की दर्दनाक कहानी दिखाने वाली ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ पर भारत में रोक, सेंसर फैसले से छिड़ी बहस

The Voice Of Hind Rajab: गाजा की दर्दनाक कहानी दिखाने वाली ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ पर भारत में रोक, सेंसर फैसले से छिड़ी बहस

The Voice Of Hind Rajab Ban: ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब'को भारत में रिलीज की मंजूरी नहीं मिली है. गाजा की सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म को लेकर अब सेंसरशिप और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर बहस तेज हो गई है.

The Voice Of Hind Rajab Ban: कभी-कभी फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं होतीं, बल्कि ऐसी सच्ची कहानियां दिखाती हैं जो दिल को झकझोर देती हैं. लेकिन, जब ऐसी फिल्में राजनीति या देशों के रिश्तों से टकराती हैं, तो मामला संवेदनशील हो जाता है. हाल ही में फिल्म The Voice of Hind Rajab को लेकर भी कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसे भारत में रिलीज से पहले ही रोक दिया गया. इस फिल्म को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसे भारत में रिलीज से पहले ही सेंसर कर दिया गया. इस फैसले ने सिनेमा और राजनीति के रिश्ते पर नई बहस छेड़ दी है.

‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ हाल ही में लोगों के बीच चरेचा में तब बनी जब इस फिल्म को 98वें ऑस्कर अवॉर्ड में नॉमिनेशन मिली. कौथर बेन हानिया की डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को मार्च की शुरुआत में ही भारत में रिलीज किया जाना था, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेशन की मंजूरी के दौरान इसकी रिलीज से रोक दिया गया है. भारत में इस फिल्म की रिलीज की इजाजत नहीं मिली है. कहा जा रहा है कि फिल्म का विषय काफी संवेदनशील है और इसका असर भारत और इजराइल के रिश्तों पर पड़ सकता है. इसी वजह से सेंसर बोर्ड ने इसे मंजूरी नहीं दी.

संबंधों की वजह से नहीं मिली मंजूरी

फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना ने बताया है कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के पास भेजा गया था. बोर्ड को इसमें कोई आपत्तिजनक कंटेंट नहीं मिला, लेकिन इसे संवेदनशील माना गया है, फिल्म की स्क्रीनिंग फरवरी के आखिरी हफ्ते में हुई थी. उन्होंने आगे बताया कि फिल्म में न हिंसा है, न अश्लील सीन और न ही कोई राजनीतिक संवाद है. इसके बावजूद भारत-इजराइल संबंधों को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि आमतौर पर फिल्मों में बदलाव के लिए कट्स सुझाए जाते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है.

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सच्ची घटना पर आधारित फिल्म

ये फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित बताई जा रही है. इसमें गाजा की एक छोटी बच्ची की कहानी दिखाई गई है, जो युद्ध और हिंसा के बीच फंस जाती है. फिल्म उसकी तकलीफ, डर और मदद के इंतजार को बेहद भावुक तरीके से दिखाती है, जिससे दर्शक जुड़ जाते हैं. दुनियाभर में इस फिल्म को काफी सराहना मिल चुकी है. इसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया गया और कई अवॉर्ड्स भी मिले. यही वजह है कि फिल्म पहले से ही चर्चा में थी, लेकिन भारत में रिलीज रुकने के बाद ये और ज्यादा सुर्खियों में आ गई.

The Voice Of Hind Rajab

23 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन

इसका प्रीमियर पिछले साल के वेनिस फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां लोगों ने इस फिल्म की सराहना करते हुए रिकॉर्ड तोड़ 23 मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाई थीं. बाद में इसे सिल्वर लायन ग्रैंड जूरी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. इस फिल्म में 29 जनवरी 2024 को मारी गई एक छोटी बच्ची हिंद रजब की दर्दनाक कहानी दिखाई गई है. ये बच्ची गाजा में एक हमले के दौरान अकेली बची थी और अपने परिवार के लोगों की लाशों के बीच कार में फंसी हुई थी. उसने फिलिस्तीन की इमरजेंसी सर्विस को कॉल करके मदद की गुहार लगाई, बार-बार रोते हुए कहती रही कि उसे बचा लिया जाए. दूसरी तरफ इजराइल डिफेंस फोर्स के टैंक उसके करीब पहुंच रहे थे, जिससे हालात और डरावने हो गए थे.

ऑस्कर में भी मिला था नॉमिनेशन

फिलिस्तीन रेड क्रिसेंट के वॉलंटियर्स उसे फोन पर शांत रखने की कोशिश कर रहे थे और उसकी लोकेशन पर एंबुलेंस भेजने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से रेस्क्यू सफल नहीं हो पाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार पर सैकड़ों गोलियां चलाई गईं और उसे बचाने पहुंचे दो पैरामेडिक्स की भी जान चली गई. ये पूरी घटना बेहद दर्दनाक थी, जिसे बाद में अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी दर्ज किया गया. इस फिल्म को ऑस्कर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म की कैटेगरी में नॉमिनेशन मिली थी.