Toxic: एक्टिंग में फिर चमके रॉकिंग स्टार यश! लेकिन ‘टॉक्सिक’ के 5 विलेन ने बिगाड़ा खेल, रिकॉर्ड्स तोड़ने से क्यों चूकी फिल्म?
Toxic: 'केजीएफ' स्टार यश की 'टॉक्सिक' से सब फिल्मों को पीछे छोड़ने की उम्मीद थी, लेकिन इन 5 बड़े कारणों ने इसकी रफ्तार थाम दी. जानते हैं टॉक्सिक के उन 5 विलेन के बारे में.
Toxic: केजीएफ’ फ्रैंचाइजी से पैन-इंडिया स्तर पर तहलका मचाने वाले रॉकिंग स्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर थिएटर में जो माहौल बना है, वो शानदार है. फिल्म ने टिकट खिड़की पर शुरुआत भी अच्छी की और करोड़ों रुपये भी ये फिल्म अपने नाम कर रही है, लेकिन जिस तरह के ऐतिहासिक और ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर आंकड़ों की उम्मीद ट्रेड पंडित लगा रहे थे, फिल्म वहां तक पहुंचने में संघर्ष करती दिख रही है.
दर्शकों की एकतरफा वाहवाही मिलने के बजाय फिल्म को लेकर सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. दरअसल यश की इस फिल्म के अंदर ही वो 5 सबसे बड़े ‘विलेन’ छिपे हैं, जिन्होंने इसकी आंधी जैसी रफ्तार को धीमा कर दिया.
1. हीरो का जरूरत से ज्यादा अनरिलेटेबल और डार्क शेड
भारतीय सिनेमा का दर्शक अपने नायक में ‘ग्रे शेड’ स्वीकार कर लेता है, जैसा कि ‘केजीएफ’ के रॉकी भाई या कई अन्य एंटी-हीरो फिल्मों में देखा गया, जहां किरदार गलत रास्ते पर था लेकिन उसके पीछे एक वजह थी. लेकिन ‘टॉक्सिक’ में यश का किरदार सेकंड हाफ तक आते-आते इतना ज्यादा प्योर नेगेटिव हो जाता है कि दर्शक उससे इमोशनल रूप से बिल्कुल कट जाते हैं. जब मुख्य पात्र से हमदर्दी ही खत्म हो जाए, तो आम दर्शक उसकी जीत या हार की परवाह करना छोड़ देता है.
2. जरूरत से ज्यादा ‘ब्रूटल वायलेंस’ और फैमिली ऑडियंस से दूरी
फिल्म को पूरी तरह ‘अडल्ट्स’ के कैनवस पर गढ़ा गया है. इसमें दिखाई गई हिंसा, डार्क टोन और आक्रामकता इतनी अधिक है कि ये फैमिली ऑडियंस और बच्चों को पूरी तरह से थिएटर्स से बाहर कर देती है. भारत में कोई भी फिल्म जब तक परिवार के साथ नहीं देखी जाती, तब तक 800-1000 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है.

यश के दो रोल
3. कमजोर इमोशनल कोर और बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले
फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट, सिनेमैटोग्राफी और इंटरनेशनल फील लाजवाब है, लेकिन राइटिंग के स्तर पर वह आत्मा गायब दिखी जो दर्शकों को बांधती है. कहानी कई हिस्सों में इतनी उलझकर रह जाती है कि दर्शक थ्रिल महसूस करने के बजाय खुद को घटनाओं से अलग-थलग महसूस करने लगता है.
4. भारी-भरकम स्टारकास्ट का अधूरा इस्तेमाल
फिल्म में देश के कई बेहतरीन और नेशनल अवॉर्ड विनिंग कलाकारों की मौजूदगी थी. दर्शकों को उम्मीद थी कि यश के सामने उनके किरदारों के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिलेगा. हालांकि, स्क्रीनप्ले पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ मुख्य किरदार के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया, जिससे बाकी किरदारों को अपनी पूरी क्षमता दिखाने की जगह नहीं मिली.
5. उम्मीद से अलग निकली फिल्म
फिल्म के शुरुआती प्रोमोज और टीजर्स ने दर्शकों के मन में एक अलग ही जॉनर की यानी हाई-ऑक्टेन ड्रामा के साथ लव स्टोरी की उम्मीद जगा दी थी. लेकिन जब दर्शक थिएटर पहुंचे, तो उन्हें एक बेहद धीमा, साइकोलॉजिकल और डार्क सिनेमा देखने को मिला. उम्मीदों और पर्दे की हकीकत के इसी फासले ने माउथ पब्लिसिटी का बंटाधार कर दिया.
यश ने अपने हिस्से का काम पूरी शिद्दत और स्टाइल से निभाया है, लेकिन फिल्म की यह पांच अंदरूनी खामियां ही इसके रिकॉर्डतोड़ बॉक्स ऑफिस रन के आगे सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गईं.




