होर्मुज में जंग का काउंटडाउन! क्या अमेरिका शुरू करेगा सबसे खतरनाक ऑपरेशन?

होर्मुज में जंग का काउंटडाउन! क्या अमेरिका शुरू करेगा सबसे खतरनाक ऑपरेशन?

मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग का खतरा मंडरा रहा है. ईरान को आशंका है कि अमेरिका बड़े हमले की तैयारी में है, जिसका जवाब देने के लिए उसने पलटवार की योजना बनाई है. होर्मुज और अरब सागर में तनाव चरम पर है. अमेरिका ईरान के यूरेनियम व मिसाइल ठिकानों को निशाना बना सकता है. वहीं ईरान ने अमेरिकी नौसेना और इजराइल पर जवाबी हमले की धमकी दी है.

मिडिल-ईस्ट में कभी भी तबाही का विस्तार हो सकता है. ईरान को अंदेशा है कि अमेरिका बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. दूसरी तरफ ईरान ने भी काउंटर अटैक का प्लान बना लिया है. यानी होर्मुज से लेकर ओमान की खाड़ी तक समंदर का पानी कभी भी धधक सकता है. लहरों पर आक्रोश सवार हो गया है. ट्रंप ने फाइनल अल्टीमेटम दे दिया है. जबकि ईरान ने अमेरिकी नेवल फ्लीट को अरब सागर में डुबोने की धमकी दे डाली है.

अमेरिका कभी भी युद्ध के दूसरे चरण का ऐलान कर सकता है, जिसमें पहला टारगेट ईरान का 450 किलो यूरेनियम है. दूसरा टारगेट ईरान की 100 से ज्यादा मिसाइल सिटीज हैं. तीसरा टारगेट ईरान के तेल ठिकाने हैं. चौथा टारगेट होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करना है. पांचवां टारगेट ईरान में तख्तापलट कराना है. फिर इसके लिए चाहे युद्ध कितना भी लंबा खींचना हो. चाहे परमाणु हथियार ही क्यों ना इस्तेमाल करने हों.

अमेरिका ने कह दिया है कि इस बार ईरान पर हमले अकल्पनीय होंगे, जिससे पूरे ईरान का सर्वनाश तय है. ट्रंप की साख दांव पर लगी है क्योंकि ईरान वार्ता में शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है. इसी वजह से वार्ता अटक रही है. अमेरिका ने तय कर लिया है कि ईरान को फिर से उठने नहीं दिया जाएगा. सैन्य ठिकानों से लेकर रिहायशी इलाकों तक हमले होंगे.

ईरान झुकेगा नहीं लड़ता रहेगा

उधर, ईरान ने भी तय कर लिया है कि वो आखिरी सांस तक लड़ता रहेगा. उनके सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई भी इसी सोच के साथ शहीद हुए थे. अभी भी पूरे ईरान में उनके पोस्टर लगे हैं. जो बता रहे हैं कि ईरान झुकेगा नहीं लड़ता रहेगा. ईरान ने हमले का तरीका बदला है. उसके पास हथियारों की बड़ी खेप है. वो हर कीमत पर अमेरिका को होर्मुज से दूर खदेड़ता रहेगा.

इस बार अमेरिकी एयरक्राफ्ट को टारगेट करते बड़ा नुकसान पहुंचाने की तैयारी है. इसका प्लान बन चुका है. अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान पूरे अरब में आग लगा सकता है. ईरान’ऑपरेशन अरब सागर’ कभी भी शुरू कर सकता है. उसके टारगेट पर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. वहीं, अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी के लिए अरब सागर में तैनाती की हुई है, जिसमें 16 युद्धपोत, 11 डिस्ट्रॉयर, 140 फाइटर जेट, 50 डिफेंस सिस्टम और 15 हजार सैनिक हैं.

अमेरिकी नेवल फ्लीट पर ईरान ने हमले का नया प्लान बनाया है. इसके तहत टॉरपीडो की जगह अंडरवॉटर ड्रोन से हमला किया जा सकता है. बड़े जहाजों की जगह छोटे शिप से हमला किया जा सकता है. जबकि ईरान कार्गो शिप पर मिसाइल लॉन्चर नेवल फ्लीट के एकदम पास ले जाकर तबाही मचा सकता है.

ईरान ऐसे करेगा हमला?

  • टॉरपीडो की जगह अंडरवॉटर ड्रोन
  • बड़े जहाजों की जगह छोटे शिप
  • कार्गो शिप पर मिसाइल लॉन्चर

ईरान के तेवर बेहद आक्रामक हैं. मोसाद का इनपुट है कि ईरान ने युद्धविराम के दौरान पहले से कहीं ज्यादा हथियार बना लिए हैं. ईरान इस बार भी टारगेटिड अटैक वाली रणनीति अपना सकता है लेकिन इस बार बड़ा अंतर ये होगा कि वो एक साथ ट्रिपल अटैक कर सकता है. उसके टारगेट पर सबसे पहले इजराइल है, जिसके सर्वनाश की कसम सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई खा चुके हैं.

दूसरे टारगेट पर अरब सागर में मौजूद अमेरिकी फ्लीट है, जिससे होर्मुज में एंट्री नहीं करने देगा. जबकि तीसरे टारगेट पर अरब देश हैं. जहां पिछली बार अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे. इस बार सैन्य ठिकानों के अलावा शहरों पर भी हमले कर सकता है. यानी पूरे अरब पर संकट मंडरा रहा है. वैसे भी ईरान अरब देशों के साथ ना देने से बौखलाया हुआ है.

माजिद मोसावी की धमकी

अब अगर ईरान पर हमले की जुर्रत अमेरिका ने दिखाई तो हालात काफी खौफनाक हो सकते हैं. IRGC एयरोस्पेस फोर्स के चीफ माजिद मोसावी ने धमकी दी है कि हम अमेरिका के सैन्य ठिकाने तबाह कर देंगे और हमारी नजर तुम्हारे जहाजों पर भी है. ध्यान रहे कि होर्मुज पर कब्जा करने का तुम्हारा ख्वाब कभी नहीं पूरा होने देंगे. यानी ईरान ने ट्रंप के गुरूर को होर्मुज में डुबोने की पूरी तैयारी की हुई है.

ठीक उसी तरह जैसे वो अरब में मौजूद अमेरिका के 50 हजार से ज्यादा सैनिकों को मिसाइल स्ट्राइक से मार गिराने का प्लान बना चुका है. ईरान इस बार युद्ध में उन तमाम ठिकानों को टारगेट करने जा रहा है, जिनके तबाह होने से अरब देशों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा. दरअसल इसके जरिए ईरान अपनी नाकाबंदी का बदला लेना चाहता है और अरब देशों को वास्तविकता बताना चाहता है कि अमेरिका के युद्ध से सिर्फ औऱ सिर्फ अरब देशों पर संकट आएगा.

यूरेनियम पर कब्जे के लिए ग्राउंड ऑपरेशन?

ईरान को अंदाजा हो चुका है कि अमेरिका का हमला करने की मूल वजह क्या है. क्योंकि अमेरिका को हर कीमत पर यूरेनियम चाहिए. इसलिए यूरेनियम पर कब्जे के लिए ग्राउंड ऑपरेशन शुरू हो सकता है, जिसके पहले चरण में खर्ग द्वीप पर कब्जा किया जाएगा. खर्ग पर अमेरिका कमांड सेंटर और रनवे बनाएगा. ईरान का सुरक्षा घेरा तोड़ा जाएगा. युद्धपोत और सी माइन्स ध्वस्त कर दी जाएंगी.

दूसरे चरण में कमांडो ईरान की एटमी साइट पहुंचेंगे. हेलिकॉप्टर और पैराशूट से ऑपरेशन शुरू किया जाएगा. A-10 अटैक जेट्स कमांडो को कवर देंगे. बंकर बस्टर बम से एटमी साइट पर हमला किया जा सकता है. तीसरे चरण में कमांडो अंडरग्राउंड फैसिलिटी में घुसेंगे. 450 किलो यूरेनियम पर कब्जा करेंगे. हेलिकॉप्टर से यूरेनियम खर्ग आइलैंड पहुंचाया जा सकता है लेकिन कागज पर ये प्लान जितना आसान दिखता है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है क्योंकि ईरान ना तो होर्मुज पार करने देगा. ना ही ग्राउंड ऑपरेशन. ऐसे में अमेरिका के पास हवाई मार्ग ही बचता है. जहां से गरजते हुए अमेरिकी प्लेन घुसेंगे और पूरे ईरान को कब्रिस्तान में तब्दील कर देंगे.

ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष.

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