Zojila Tunnel Project: दो बार पार कर जाएंगे नोएडा, फिर भी नहीं होगी खत्म… इतना बड़ा है कश्मीर में बना जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट

Zojila Tunnel Project: दो बार पार कर जाएंगे नोएडा, फिर भी नहीं होगी खत्म… इतना बड़ा है कश्मीर में बना जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट

Asia Longest Tunnel Project: जोजिला सुरंग परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. 30 किलोमीटर लंबे पूरे कॉरिडोर के जरिए श्रीनगर और लेह के बीच सालभर कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी. पहले बर्फबारी की वजह से रास्ते बंद हो जाते थे.

Asia Longest Zojila Tunnel Project: ये कहानी है एशिया के सबसे लंबे टनल प्रोजेक्ट की, जो जल्द ही आकार लेने वाला है. देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जोजिला टनल प्रोजेक्ट तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. अब तक साल में चार से पांच महीने तक भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा बर्फ की मोटी चादर में दब जाता था, जिससे यह मार्ग बंद हो जाता था. आम लोगों के साथ-साथ सेना की आवाजाही भी प्रभावित होती थी. लेकिन जोजिला टनल के निर्माण के साथ यह स्थिति बदलने जा रही है. यह सुरंग न केवल यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी पूरे क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी.

यह टनल समुद्र तल से करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर जोजिला दर्रे के नीचे बनाई जा रही है. इसके पूरा होने के बाद श्रीनगर और लेह के बीच हर मौसम में सड़क संपर्क संभव हो सकेगा. परियोजना की कुल लागत 6,809.69 करोड़ रुपये से अधिक है और इसे वर्ष 2027 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है.

जोजिला सुरंग की कितनी लंबाई?

जोजिला सुरंग की मुख्य टनल की लंबाई लगभग 13.153 किलोमीटर है. यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के गंदेरबल जिले के बालटाल क्षेत्र को लद्दाख के द्रास-मीनामार्ग इलाके से जोड़ेगी. यही कारण है कि अधिकांश सरकारी दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्टों में इसे 13 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंग बताया जाता है. हालांकि, जब पूरे जोजिला टनल प्रोजेक्ट की बात की जाती है तो इसकी लंबाई करीब 30.18 किलोमीटर बताई जाती है. इसमें मुख्य सुरंग के अलावा एप्रोच रोड, लिंक रोड, एस्केप टनल, कट-एंड-कवर सेक्शन और अन्य संरचनाएं भी शामिल हैं.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सोनामार्ग से बालटाल और आगे मीनामार्ग तक फैला पूरा जोजिला नेटवर्क लगभग 31 किलोमीटर लंबा है. इस परियोजना में मुख्य सुरंग के अलावा निलग्रार क्षेत्र की दो अतिरिक्त सुरंगें, तीन पुल, स्नो गैलरी और कट-एंड-कवर सेक्शन शामिल हैं. यही वजह है कि कई बार परियोजना की कुल लंबाई 30 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है.

Asia Longest Zojila Tunnel (3)

नोएडा से तुलना करें तो कितनी बड़ी है यह परियोजना?

नोएडा की उत्तर से दक्षिण लंबाई लगभग 15 से 18 किलोमीटर मानी जाती है. ऐसे में यदि जोजिला परियोजना की कुल लंबाई करीब 30 किलोमीटर मानी जाए तो यह लगभग दो बार नोएडा पार करने के बराबर है. यानी अगर कोई इस पूरे कॉरिडोर की दूरी तय करे तो वह नोएडा की लंबाई से लगभग दोगुनी दूरी तय करेगा.

आधुनिक तकनीक से लैस होगी स्मार्ट टनल

जोजिला सुरंग को अत्याधुनिक स्मार्ट टनल के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसमें वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, टनल रेडियो सिस्टम, ट्रैफिक लॉगिंग उपकरण और आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इसके अलावा सुरंग में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, एससीएडीए (SCADA) प्रणाली और उन्नत सुरक्षा तंत्र भी लगाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.

Jojila (2)

स्थानीय लोगों को मिला रोजगार

प्रोजेक्ट का लाभ केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, परियोजना के निर्माण कार्य में अब तक 1,043 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया गया है. इनमें लगभग 77 प्रतिशत कर्मचारी जम्मू-कश्मीर से हैं, जबकि करीब 28 प्रतिशत गंदेरबल जिले के निवासी हैं. इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिली है.

क्यों हुई परियोजना में देरी?

जोजिला सुरंग को पहले सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि कोविड-19 महामारी, 2024 में सोनामार्ग सुरंग परियोजना से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ. इन्हीं कारणों से अब परियोजना के पूर्ण होने की समयसीमा आगे बढ़ गई है और इसे 2027 तक पूरा किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है.

Asia Longest Zojila Tunnel (1)

कब रखी गई थी आधारशिला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2018 को लेह के जिवे-त्साल में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोजिला सुरंग परियोजना की आधारशिला रखी थी. इसके बाद से यह परियोजना लगातार निर्माणाधीन है और कई कठिन भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद तेजी से आगे बढ़ रही है.

जोजिला सुरंग से क्या होगा फायदा?

फिलहाल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का सड़क संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है. सुरंग बनने के बाद यह समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी. इसके जरिए श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग पर पूरे साल आवागमन संभव होगा. यात्रा समय भी लगभग 3 घंटे 30 मिनट से घटकर केवल 15 से 20 मिनट रह जाएगा. इसके अलावा हिमस्खलन से होने वाली बाधाएं भी काफी हद तक खत्म हो जाएंगी.

Jojila (1)

रणनीतिक दृष्टि से क्यों है बेहद अहम?

जोजिला सुरंग का महत्व केवल नागरिकों की सुविधा तक सीमित नहीं है. लद्दाख की सीमाएं चीन और पाकिस्तान से लगती हैं. वर्तमान में कई बार मौसम खराब होने पर सेना को हवाई जहाजों पर निर्भर रहना पड़ता है. सुरंग बनने के बाद सेना की लॉजिस्टिक क्षमता मजबूत होगी और सीमावर्ती क्षेत्रों तक सैनिकों व सैन्य सामग्री की आवाजाही अधिक तेज और सुरक्षित हो सकेगी. साथ ही पर्यटन, व्यापार, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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राहुल कुमार
राहुल कुमार

प्रिंट, TV और डिजिटल की दुनिया को सीखते-समझते लगभग 9 साल हो गए हैं. राजस्थान पत्रिका में अखबार और टीवी की रिपोर्टिंग से शुरुआत... इसके बाद प्रभात खबर पटना में अलग-अलग जिलों के एडिशन का बतौर इंचार्ज 5 साल तक रहा. यहां से दिल्ली आया तो NDTV में काम करने का मौका मिला. अगला पड़ाव TV9 रहा, जहां मैं स्टेट टीम का हिस्सा हूं. पत्रकारिता का क, ख, ग... माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में सीखा. यहां से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. खबरों में आम आदमी के लिए क्या, किस राजनीतिक हलचल के मायने क्या? बस इसी की तलाश हमेशा रहती है. समाज से जुड़े मुद्दों को उठाना और उसे आसान भाषा में समझाने की कोशिश जारी है.

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