1262 रुपए का प्याज, खर्च आया 1263 रुपए…12 क्विंटल बेचकर भी कर्जदार हुआ किसान, मंडी से खाली हाथ लौटा

1262 रुपए का प्याज, खर्च आया 1263 रुपए…12 क्विंटल बेचकर भी कर्जदार हुआ किसान, मंडी से खाली हाथ लौटा

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में एक किसान को 1262 किलो प्याज बेचने पर सिर्फ 1262 रुपए मिले, जबकि मंडी तक लाने का खर्च इससे ज्यादा रहा. मामला किसानों की बदहाल स्थिति को दिखा रहा है.

Maharashtra Onion Farmers: खेत में दिन-रात मेहनत करने वाला किसान आखिर कब तक यूं ही टूटता रहेगा? कभी बारिश फसल बर्बाद कर देती है, तो कभी सूखा किसान की कमर तोड़ देता है और अगर किसी तरह फसल तैयार होकर मंडी तक पहुंच भी जाए, तो वहां गिरते दाम किसान की उम्मीदों का गला घोंट देते हैं. ऐसी ही एक दर्दनाक तस्वीर महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर जिले के पैठण तालुका से सामने आई है, जहां वरुडी गांव के किसान प्रकाश गलधर अपने 12 क्विंटल प्याज को बड़ी उम्मीदों के साथ कृषि उपज मंडी में बेचने पहुंचे थे.

इस प्याज को उगाने के लिए उन्होंने महीनों खेत में मेहनत की. बीज खरीदे, खाद डाली, दवाइयों पर पैसा खर्च किया और समय-समय पर सिंचाई भी की. दिन की झुलसा देने वाली धूप और रातों की चिंता तक झेली, सिर्फ इस उम्मीद में कि फसल बिकेगी तो घर का खर्च चलेगा. बच्चों की फीस भरेगी और कर्ज का कुछ बोझ कम होगा. लेकिन मंडी में जो हुआ, उसने इस किसान की सारी उम्मीदें तोड़ दीं. पैठण कृषि उपज मंडी में राज प्याज कंपनी में किसान प्रकाश गलधर अपना प्याज लेकर पहुंचे.

1 रुपए किलो बिकी प्याज

मंडी में 25 बोरी प्याज वजन के लिए रखी गई. कुल वजन निकला 1262 किलो. जब बोली लगी, तो एक क्विंटल प्याज का दाम सिर्फ 100 रुपए मिला. यानी एक किलो प्याज की कीमत लगी महज 1 रुपए. पूरे 1262 किलो प्याज के बदले किसान को कुल 1262 रुपए मिले. हैरानी की बात यह है कि खेत से मंडी तक प्याज लाने में ही किसान के 1263 रुपए खर्च हो गए. प्याज की बिक्री पर किसान को मुनाफा मिलने की बात तो दूर 1 रुपए का घाटा सिर्फ मंडी तक लाने में ही हो गया.

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  • मजदूरों यानी कुली को देने पड़े 125 रुपए
  • तुलाई यानी वजन के लिए कटे 38 रुपए .
  • भराई के नाम पर 25 रुपए काट लिए गए.
  • वाराई के नाम पर 25 रुपए वसूल लिए गए
  • मंडी तक प्याज लाने का किराया लगा 500 रुपए.
  • और प्याज भरने के लिए इस्तेमाल हुई 25 बोरियों के 550 रुपए अलग काट लिए गए.

Slip

कर्जदार बन रहा देश का किसान

यानि किसान को मिले 1262 रुपए , लेकिन प्याज बेचने पर कुल खर्च हो गया 1263 रुपए. हालात इतने बदतर हो गए कि अपनी मेहनत की फसल बेचने के बाद भी किसान को एक रुपया अपनी जेब से व्यापारी को देना पड़ा. सोचिए जिस किसान ने महीनों मेहनत कर खेत में फसल उगाई. वही किसान आज अपनी उपज बेचकर कर्जदार बन रहा है. यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि देश के लाखों किसानों की उस पीड़ा की तस्वीर है, जहां मेहनत की कीमत मिट्टी से भी सस्ती हो चुकी है.

आज सवाल सिर्फ एक रुपए का नहीं है. सवाल उस व्यवस्था का है, जहां देश का अन्नदाता सबसे ज्यादा परेशान, सबसे ज्यादा बेबस और सबसे ज्यादा उपेक्षित नजर आ रहा है.

विनोद जगदाले
विनोद जगदाले

विनोद जगदाले को 22 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है. वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं. ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और एक्सक्लूसिव खबरें भी सामने लेकर आए. उनकी पहचान निष्पक्ष, बेबाक और जमीनी पत्रकार के तौर पर की जाती है. विनोद जगदाले 10 से ज्यादा सम्मान से सम्मानित और जनहित की आवाज को मजबूती से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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