Ae Mere Watan Ke Logon Song: सिगरेट के डिब्बे पर लिखा देशभक्ति गीत, जो बना सदी का सबसे मशहूर गाना, पहले लता ने कर दिया था रिजेक्ट
देशभक्ति पर कई ऐसे गीत बने हैं जो फैंस को भावुक कर देते हैं. मगर एक गीत ऐसा भी था जिसने देश के समकालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखें नम कर दी थीं. बता रहे इस गाने से जुड़ी कुछ रोचक बातें.
Ae Mere Watan Ke Logon Trivia: देश को आजादी दिलाने में सबसे बड़ा योगदान उन क्रांतिकारियों का रहा जिन्होंने विद्रोह की राह चुनी और अपने जीवन का बलिदान दे दिया. ऐसे ही जवानों की शहादत को बॉलीवुड में भी खूब दिखाया गया और कई सारे गाने बने. इन गानों को सुन आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और इंसान की आंखें भर जाती हैं. ऐसा ही एक नॉन फिल्मी सॉन्ग था जिसका असर ऐसा रहा कि जिसने भी इस गाने को सुना रोए बिना नहीं रह सका. ये गाना था ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’.
इस गाने को जब भी कोई सुनता है देश के वीर जवानों की याद में इमोशनल हो जाता है. भले ही ये गाना फिल्मी नहीं था लेकिन इस गाने के बनने की कहानी काफी फिल्मी थी. 15 अगस्त 2026 को देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. इस मौके पर देशभर में उल्लास का माहौल है. अंग्रेजों से आजादी हासिल किए 8 दशक बीत गए हैं. ऐसे में आज कहानी उस गाने की जिसे कवि प्रदीप ने लिखा था और इसे लता मंगेशकर ने गाया था. यही वो गाना था जिसे सुन पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखें नम हो गई थीं. ये गाना 1962 इंडो-चीन युद्ध के दौरान लिखा गया था.
सिगरेट के डिब्बे पर लिखा देशभक्ति गीत
1962 युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की शहादत से देशभर में दुख का माहौल था. इस दौरान कवि प्रदीप भी काफी दुखी थी. वे मुंबई के माहिम समुद्री तट पर टहल रहे थे. अचानक उनके दिमाग में ये गाना गूंजा. उनके पास उस समय ना तो कागज था ना तो कलम थी. ऐसे में उन्होंने पास खड़े एक अजनबी से कलम मांगी और सिगरेट के डिब्बे के अंदर वाले फॉइल में उन्होंने इस गाने की शुरुआती पंक्तियां लिखीं. इसके बाद बाद में उन्होंने इसे कम्प्लीट किया. गाने के बोल थे- ”ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी.”
लता ने क्यों गाने से कर दिया था मना?
बहुत लोगों को इस बारे में आज भी नहीं पता होगा कि अपने करियर के इस कालजयी गीत को गाने से पहले लता मंगेशकर ने मना कर दिया था. दरअसल बिजी शेड्यूल और रिहर्सल के लिए टाइम ना निकाल पाने की वजह से लता मंगेशकर ने ये गीत गाने से मना कर दिया था. ऐसे में उनकी छोटी बहन आशा भोसले ये गाना गाने वाली थीं. लेकिन कवि प्रदीप और गीतकार सी रामचंद्र ने भी चाहते थे कि इस गाने को लता मंगेशकर ही गाएं. बहुत मिन्नतों के बाद लता मंगेशकर राजी हुईं और उन्होंने फाइनली ये गीत गाया. 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में लता जी ने पहली बार ये गाना गाया था. इसके बाद कई मौकों पर लोगों की रिक्वेस्ट पर लता मंगेशकर ने ये गीत गाया.
जब भरी जनता के बीच रो पड़े जवाहरलाल नेहरू
जब लता मंगेशकर ने साल 1963 में ये गाना पहली बार गाया था उस दौरान वहां देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे. भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस दौरान लता जी की आवाज में ऐ मेरे वतन के लोगों गीत सुनकर नेहरू जी की आंखें नम हो गई थीं और वे सबके सामने रो पड़े थे. कार्यक्रम में लता जी की प्रस्तुति के दौरान सारा माहौल गमगीन हो गया था.




