KBC 18 Promo Explain: अब ‘सोचना और बदलना पड़ेगा’… KBC 18 के प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने जो कहा, समझें उसके मायने

KBC 18 Promo Explain: अब ‘सोचना और बदलना पड़ेगा’… KBC 18 के प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने जो कहा, समझें उसके मायने

KBC 18 on Sony Tv: सफलता के लिए समय के साथ बदलाव कितना जरूरी है- इसे जानने के लिए अमिताभ बच्चन से बेहतर नजीर और क्या हो सकता है. कौन बनेगा करोड़पति का 18वां सीजन आने से पहले अमिताभ बच्चन ने प्रोमो में इसकी तरफ इशारा किया है. पहले से तैयार जवाब ही काफी नहीं बल्कि उत्तर के लिए अब दिमाग भी लगाना पड़ेगा. बिग बी ने इस पर क्यों जोर दिया है, समझते हैं.

स्वतंत्रता दिवस से पहले अमिताभ बच्चन का KBC यानी कौन बनेगा करोड़पति गेम शो का एक बार फिर आगाज होने जा रहा है. तारीख है- 10 अगस्त. यह केबीसी का 18वां सीजन होगा. इस बार इसमें कई बदलाव देखने को मिलेंगे. गेम शो शुरू होने से पहले इसके एक नहीं, बल्कि बारी-बारी से चार प्रोमो आए हैं. सभी प्रोमो सुर्खियों में हैं. इसके कंटेंट चर्चा का विषय है. ये प्रोमो एक-दूसरे को आगे बढ़ाने वाले हैं. यह सही है कि केबीसी पैसे जीतने का खेल है लेकिन इसकी बानगी में समय की धड़कन को भी शिद्दद से महसूस किया जा सकता है.

अमिताभ बच्चन अपने अंदाज और संवाद में मौजूदा समय के मिजाज को बहुत ही बारीकी से पकड़ते हैं और उसे बहुत ही थ्रिल के साथ प्रस्तुत करते हैं- केबीसी 18 के प्रोमोज में एक बार फिर बिग बी ने आज की पीढ़ी को जो मैसेज दिया है, इसे विस्तार से समझने की जरूरत है.

शो के रोचक और रोमांचक होने की संभावना

ये प्रोमोज बताते हैं इस बार केबीसी 18 का कांसेप्ट कुछ अलग होने जा रहा है. रोचक और रोमांचक तो होगा ही यह जानकारी का नया विधान प्रस्तुत करने वाला भी होगा. यहां प्रतियोगियों की कड़ी परीक्षा होने वाली है. किसी भी सवाल का जवाब महज रटा-रटाया उत्तर नहीं होगा बल्कि जीतने के लिए अब दिमाग लगाना पड़ेगा. तर्कशील होना होगा. इसलिए इन प्रोमोज में अमिताभ इस बात पर जोर देते हैं कि सोचना पड़ेगा और बदलना पड़ेगा.

केबीसी 18 के पहले प्रोमो में अमिताभ बच्चन कहते हैं- “आजकल जवाब हर जगह मिलने लगा है, आपकी जेब में भी. मतलब मोबाइल फोन पर. इसलिए इस बार केबीसी में कुछ बदलने का प्रयत्न किया गया है.” अमिताभ आगे कहते हैं- “केवल जवाब याद रखने से ही काम नहीं चलेगा बल्कि जवाब के लिए अब सोचना भी पड़ेगा.” मतलब कि तर्क करना भी पड़ेगा .

एआई की आदत ने सोचने की शक्ति कम की

केबीसी 18 का यह प्रोमो ऐसे समय में आया है जब आज के दौर में एआई, चैटजीपीटी, वाट्सऐप ग्रुप्स आदि ने नई पीढ़ी को बहुत ही सुविधाभोगी बना दिया है. किसी भी सवाल के लिए नई-नई तकनीक का सहारा लेने की आदत बढ़ती जा रही है. एआई से किसी भी सवाल का रटा रटाया सा जवाब तो पाया जा सकता है लेकिन सोचा-विचारा नहीं जा सकता. बुद्धिजीवी और रचनाकार जमात पहले से ही इस पर सवाल उठा रही थी कि एआई सोच नहीं सकता, एआई कल्पना नहीं कर सकता- अब अमिताभ के इस प्रोमो में भी इसी बात की ओर इशारा किया गया है.

केबीसी 18 का दूसरा प्रोमो इसे और आगे बढ़ाता है. अमिताभ बच्चन कहते हैं- “भूगोल, इतिहास, खेल, विज्ञान… इस बार केबीसी के खेल में काफी नहीं होगा…क्योंकि खेल बदल गया है…” इन दिनों वाट्सऐप ग्रुप्स भी ज्ञान का एक बड़ा स्रोत बन गया है. वाट्सऐप पर सूचनाएं और जानकारियां तेजी से वायरल होती रहती हैं. रेडिमेड फॉर्मेट में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. ये कई बार गलत होती है और सही भी. छात्रों में इसकी प्रैक्टिस कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है.

26 साल बाद kbc के मंच पर नई पीढ़ी

केबीसी के मंच पर भी अब ज्यादातर युवा पीढ़ी के प्रतियोगी पहुंच रहे हैं. केबीसी के प्रसारण के छब्बीस साल हो चुके हैं. और इस छब्बीस साल के लंबे अंतराल में नई-नई पीढ़ियां आ गई हैं. गुजरे जमाने की बुजुर्ग पीढ़ी से लेकर मिलेनियल और जेन-ज़ी वर्ग के युवाओं में भी केबीसी का जबरदस्त क्रेज बना हुआ है. लेकिन इस बार अमिताभ बच्चन ने प्रोमो में इस वर्ग के प्रतियोगियों को पहले ही आगाह कर दिया कि अब जवाब देने के लिए दिमाग से खेलना पड़ेगा.

केबीसी 18 के दोनों प्रोमो के आशय को अमिताभ बच्चन ने तीसरे प्रोमो में पूरी तरह से खोल कर रख दिया. उन्होंने कहा कि “आज एआई ने दुनिया को बदल दिया है, ये बदवाल रुकने वाला नहीं है, जो कल तक नामुमकिन लगता था, वो अब पल भर में मुमकिन होने लगा है- इस बदलती हुई दुनिया में हम सबको भी बदलना पड़ेगा. इसलिए केबीसी में भी हमने कुछ बदलने का प्रयत्न किया है.

एआई समय की मांग, इस्तेमाल पर चर्चा

मतलब कि पहले सोचना पड़ेगा और फिर बदलना पड़ेगा- अमिताभ बच्चन इन शब्दों पर जोर देते हैं. बदलते तकनीक की चुनौती को हम खुद को भी बदलकर ही जीत सकते हैं. बदलाव समय की मांग है. समय के साथ कदमताल करने का नजीर अमिताभ बच्चन से बेहतर क्या हो सकता है. अमिताभ की सफलता ही इसमें निहित है कि उन्होंने हमेशा समय के साथ तालमेल रखा और हर बदलाव को स्वीकार किया. अब वही मैसेज अमिताभ खेल खेल में युवाओं को भी दे रहे हैं जो एआई पर निर्भर हो गए हैं.

हालांकि इसके अलावा केबीसी 18 का एक और प्रोमो है जो बहुत ही दिलचस्प है. इस प्रोमो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की भी बात कही गई है. आगामी गेम शो में एआई की भी उपस्थिति होगी तो प्रतियोगियों को सोचना भी पड़ेगा. यानी तकनीक का सदुपयोग इंसान कैसे अपनी बुद्धिमत्ता से करे- केबीसी 18 इस बात का उदाहरण बनने जा रहा है. कुल मिलाकर नए फीचर्स से इस बार का शो बहुत ही दिलचस्प होने वाला है-ऐसा लगता है.

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संजीव श्रीवास्तव
संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव का पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है लेकिन पिछले करीब ढाई दशक से दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक का हुनर रखते हैं, देश-विदेश की राजनीति, फिल्म, लिटरेचर, क्राइम जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखते हैं. आसानी से समझ आने वाली और सोचने-विचारने वाली भाषा लिखना पसंद है. सिनेमा प्रिय विषय है- लिहाजा फिल्मों पर अब तक तीन किताबें, दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिख चुके हैं. कुछेक प्रिंट मीडिया में सब एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब 14 साल गुजारा, जहां प्राइम टाइम स्पेशल शोज/प्रोग्राम बनाने से लेकर मुंबई की एंटरटेंमेंट फील्ड में रिपोर्टिंग तक की. उसके बाद सूर्या समाचार, एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 से सम्बद्ध.

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