अमेरिका के झांसे में नहीं आ रहे ये छोटे देश! एक के बाद एक ठुकरा रहे डील

अमेरिका के झांसे में नहीं आ रहे ये छोटे देश! एक के बाद एक ठुकरा रहे डील

अमेरिका अपनी विदेश नीति के तहत घाना और जिम्बाब्वे को स्वास्थ्य सौदे के जरिए लुभाने की कोशिश कर रहा था. इन सौदों में फंडिंग के बदले देशों के नागरिकों का संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा मांगा जा रहा था. घाना और जिम्बाब्वे ने अमेरिका के झांसे में नहीं आए और उन्होंने देश के नागरिकों के डेटा की संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी.

अमेरिका की विदेश नीति खुले तौर पर सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे के लिए काम करती दिख रही है. ट्रंप शासन में अमेरिका छोटे देशों को डील के जरिए अपने और करीब लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घाना और जिम्बाब्वे अमेरिका की रणनीतियों से वाकिफ हैं और उन्होंने एक के बाद एक US डील को ठुकरा दिया. फरवरी में जिम्बाब्वे ने और अब घाना ने डील करने से मना किया है. आइए जानते हैं अमेरिका कौन सी डील इन देशों के साथ करना चाहता है.

घाना ने अमेरिका की हेल्थ डील को रिजेक्ट कर दिया है. अमेरिका घाना को फंडिग देने के बदले उससे संवेदनशील हेल्ट डेटा देने की डिमांड की. घाना ने अपने देश के नागरिकों के संवेदनशील हेल्थ डेटा को देने से मना कर दिया.

एक ऑफिसर ने बयान में कहा कि घाना ने अमेरिका के साथ एक प्रपोज्ड हेल्थ डील को उन प्रोविजन पर रिजेक्ट कर दिया है, जिनसे US एंटिटीज को बिना जरूरी सेफ्टी मेजरमेंट के देश के सेंसिटिव हेल्थ डेटा तक एक्सेस मिल जाता.उन्होंने बताया कि इसी तरह के कारण की वजह से ये डील अफ्रीकी देश घाना पीछे हट गया.

करोड़ों के बदले नागरिकों का डेटा लेने की डिमांड

घाना के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अर्नोल्ड कवरपुओ ने कहा कि रिक्वेस्ट किया गया डेटा एक्सेस का स्कोप उस मकसद के लिए आम तौर पर जरूरी से कहीं ज्यादा था जिसके लिए यह बताया गया है.फिलहाल, घाना ऑफिसर की तरफ से दिए गए इस बयान पर अमेरिका की तरफ से कोई जवाब सामने नहीं आया है. अमेरिका की ये डील्स US एड कट्स से सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ देशों को उनके पब्लिक हेल्थ सिस्टम को सपोर्ट करने और बीमारियों के फैलने से लड़ने में मदद करने के लिए US फंडिंग में करोड़ों डॉलर ऑफर करती हैं. US ने ग्लोबल हेल्थ फंडिंग के लिए ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अमेरिका फर्स्ट अप्रोच के तहत लगभग दो दर्जन अफ्रीकी देशों के साथ ऐसी हेल्थ डील की हैं.

घाना के मुताबिक, डेटा इस्तेमाल के लिए पहले से कोई मंजूरी नहीं ली गई. लगभग USD 300 मिलियन के प्रस्तावित एग्रीमेंट के तहत कावारपुओ ने कहा कि घाना को पांच सालों में US फंडिंग में लगभग USD 109 मिलियन मिलते, जिसमें घाना सरकार से सप्लीमेंटल इन्वेस्टमेंट आते. कावारपुओ में एजेंसी सीधे बातचीत में शामिल थी. एजेंसी ने चेतावनी के बारे में बताया कि यहां सेंसिटिव हेल्थ डेटा के लिए जरूरी समझे जाने वाले लोगों की पहचान की जा सकती थी.

जिम्बाब्वे ने भी की थी डील कैंसिल

फरवरी में जिम्बाब्वे के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने हेल्थ डेटा फेयरनेस और सॉवरेनिटी से जुड़े मुद्दों पर प्रस्तावित डील को रिजेक्ट कर दिया है. जाम्बिया के बारे में भी खबर है कि उसने डील के एक हिस्से पर रोक लगा दी है, हालांकि वहां कोई फैसला नहीं हुआ.

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