बाड़मेर व्यवस्था तार-तार… नामांकन खारिज होने के बाद भी लड़ा चुनाव, 187 वोटों से जीतकर सरपंच बने पूराराम!

बाड़मेर व्यवस्था तार-तार… नामांकन खारिज होने के बाद भी लड़ा चुनाव, 187 वोटों से जीतकर सरपंच बने पूराराम!

बाड़मेर की गडरारोड़ ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव में गंभीर अनियमितता सामने आई है. प्रत्याशी पूराराम का नामांकन जांच में खारिज होने के बावजूद उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की.

बाड़मेर, पंचायती राज व्यवस्था और निर्वाचन प्रक्रिया में कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है. गडरारोड़ ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रत्याशी पूराराम का नामांकन जांच के दौरान खारिज कर दिया गया था. इसके बाद नामांकन निरस्त होने की सूचना सार्वजनिक रूप से चस्पा किए जाने के बाद भी पूराराम ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर सरपंच बन गए. अब ये मामला चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है.

नामांकन खारिज, फिर भी चुनाव मैदान में उतरे

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को शिव विधानसभा के गडरा रोड सरपंच पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई थी. गडरारोड़ ग्राम पंचायत में कुल 21 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए. जांच के दौरान दो प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त किए गए, जबकि नौ प्रत्याशियों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली.

बाकी प्रत्याशियों में पूराराम पुत्र दयाराम का नामांकन निरस्त निरस्त कर दिया गया था और इसकी सूचना बोर्ड पर चस्पा की गई थी. इसके बावजूद पूराराम चुनाव मैदान में बने रहे और चुनाव परिणाम में पूराराम को 1,786 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1,599 वोट प्राप्त हुए. पूराराम ने 187 मतों के अंतर से जीत दर्ज की और सरपंच निर्वाचित हो गए. अब सवाल ये है कि यदि उनका नामांकन वास्तव में निरस्त हो गया था, उनका नामांकन वापस वैध कैसे हो गया और चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे मिली और मतदान प्रक्रिया में उनका नाम कैसे शामिल रहा?

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नामांकन निरस्त होने का आदेश हुआ था जारी

इस पूरे मामले ने निर्वाचन प्रक्रिया की निगरानी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि नामांकन निरस्त होने का आदेश जारी हो चुका था, तो उसकी पालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या संबंधित अधिकारियों और मतदान दल को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी, तो प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से क्यों नहीं रोका गया?

मामले में रिटर्निंग अधिकारी से नामांकन निरस्तीकरण के आदेश, प्रत्याशियों की अंतिम सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है. अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका किस प्रकार तय होती है. फिलहाल, पूरे मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है.

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