महाराष्ट्र MLC चुनाव: 5 सीटों के नतीजों ने बदला सियासी मिजाज, समझें पूरा गणित

महाराष्ट्र MLC चुनाव: 5 सीटों के नतीजों ने बदला सियासी मिजाज, समझें पूरा गणित

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में महाविकास आघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटों पर जीत मिली. कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट पर अपनी जीत दोहराई.

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के नतीजे आ चुके हैं. तीन सीटों पर महाविकास आघाड़ी ने जीत हासिल की, जबकि दो सीटें महायुति के खाते में गईं. इन नतीजों ने राज्य की राजनीति में कई सवाल खड़े किए हैं. नागपुर में बीजेपी के सुधाकर कोहले को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. पुणे स्नातक सीट पर शरद पवार की पार्टी की हर्षदा देशमुख-जाधव ने बीजेपी को हराया. छत्रपति संभाजीनगर में भी शरद पवार की पार्टी के डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने अजित पवार की पार्टी के मौजूदा विधायक सतीश चव्हाण को शिकस्त दी.

दूसरी ओर, पुणे शिक्षक सीट बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक सीट एकनाथ शिंदे की शिवसेना के किरण सरनाईक ने जीती. नतीजों के बाद कांग्रेस ने नागपुर की जीत को बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश बताया है. वहीं, एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी के प्रदर्शन पर विचार करने और गलतियों को सुधारने की जरूरत बताई.

आखिर इन पांच सीटों के नतीजों का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? कहां उम्मीदवारों का चयन चर्चा में रहा और कहां दूसरी पसंद के वोटों ने नतीजा बदल दिया? देखिए, पांच सीटों के नतीजों का पूरा विश्लेषण…

पुणे स्नातक सीट: बीजेपी को नहीं मिली जीत

पुणे स्नातक सीट पर शरदचंद्र पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने बीजेपी की स्मिता जाधव को हराकर जीत हासिल की. चुनाव के दौरान बीजेपी के उम्मीदवार चयन को लेकर भी चर्चा हुई थी. पार्टी ने स्मिता जाधव पर भरोसा जताया था, लेकिन वह फैसला जीत में नहीं बदल सका. दूसरी तरफ, हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत से शरद पवार की पार्टी को इस सीट पर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का मौका मिला.

इस चुनाव में स्नातक मतदाताओं से जुड़े सवाल भी अहम रहे. रोजगार, महंगाई और शिक्षा जैसे मुद्दे इस वर्ग के लोगों से सीधे जुड़े हैं. जीत के बाद इन मुद्दों पर काम करने की बात भी सामने आई. पुणे स्नातक सीट का नतीजा बताता है कि चुनाव में सिर्फ पार्टी की ताकत ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार का चयन और स्थानीय मतदाताओं का रुख भी अहम होता है.

पुणे शिक्षक सीट: बीजेपी जीती, सहयोगी दलों के अलग-अलग उम्मीदवार

पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े ने जीत दर्ज की. इस सीट पर चुनाव के साथ महायुति के भीतर उम्मीदवारों को लेकर हुए घटनाक्रम की भी चर्चा रही. बीजेपी ने कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार बनाया था. वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने शुरुआत में मंगेश चिवटे को मैदान में उतारा. चिवटे ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में चुनाव से हट गए.

इसके बाद शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप का समर्थन किया. इस तरह बीजेपी और शिवसेना के समर्थन वाले उम्मीदवार अलग-अलग हो गए. अंतिम नतीजे में कौस्तुभ गावड़े विजयी रहे. सचिन सानप को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक जयंत आसगांवकर भी चुनाव नहीं जीत सके.

इस नतीजे के साथ बीजेपी ने पुणे शिक्षक सीट पर जीत हासिल की. हालांकि, चुनाव के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने महायुति के भीतर तालमेल और उम्मीदवारों के चयन को लेकर सवाल भी खड़े किए.

अमरावती शिक्षक सीट: किरण सरनाईक की जीत

अमरावती शिक्षक सीट पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के किरण सरनाईक ने जीत हासिल की. सरनाईक को 16,663 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अदिति पोहरे को 8,636 वोट मिले. इस चुनाव में कई उम्मीदवार मैदान में थे. शिवसेना से जुड़े रहे श्रीकांत देशपांडे और बीजेपी की बागी उम्मीदवार संगीता शिंदे की मौजूदगी के कारण मुकाबले में कई राजनीतिक समीकरण बने.

सरनाईक की जीत इसलिए भी अहम रही, क्योंकि उन्होंने इस बार एक राजनीतिक दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और अपनी सीट बचा ली. जीत के बाद सरनाईक ने शिक्षक मतदाताओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि वे विधान परिषद में शिक्षकों के मुद्दे उठाएंगे और उनकी समस्याओं को हल कराने की कोशिश करेंगे.

अमरावती के नतीजे से एकनाथ शिंदे की शिवसेना को इस सीट पर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने का मौका मिला. वहीं, विपक्षी दलों के सामने शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती भी है.

छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट: शरद पवार की पार्टी की जीत

छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के बीच मुकाबला हुआ. शरदचंद्र पवार की एनसीपी के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने अजित पवार की पार्टी के मौजूदा विधायक सतीश चव्हाण को हरा दिया. डॉ. प्रतापसिंह पाटिल को 85,876 वोट मिले, जबकि सतीश चव्हाण को 67,752 वोट मिले. इस तरह पाटिल ने 18,124 वोटों से जीत हासिल की.

सतीश चव्हाण पहले लगातार तीन बार इस सीट से जीत चुके थे. इस बार उनकी हार ने मराठवाड़ा में दोनों एनसीपी गुटों के बीच राजनीतिक मुकाबले को फिर चर्चा में ला दिया. जीत के बाद डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने स्नातक युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने कहा कि रोजगार की तलाश में बड़े शहरों में रहने वाले युवाओं को हॉस्टल और मेस के खर्च में मदद देने का मुद्दा सरकार के सामने उठाएंगे. उन्होंने जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की बात भी कही.

दूसरी ओर, अजित पवार की पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने चुनावी नतीजों पर विचार करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी गलतियों को समझना होगा, काम करने के तरीके में सुधार करना होगा और जनता का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश करनी होगी. यह नतीजा मराठवाड़ा में दोनों एनसीपी गुटों के बीच राजनीतिक ताकत की लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया है.

नागपुर स्नातक सीट: दूसरी पसंद के वोटों से बदला नतीजा

नागपुर स्नातक सीट की मतगणना के दौरान शुरुआती बढ़त और अंतिम नतीजे में बड़ा अंतर देखने को मिला. बीजेपी के सुधाकर कोहले पहली पसंद के वोटों की गिनती में आगे थे. उन्हें 60,924 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को 56,630 वोट मिले थे. इस चरण में कोहले 4,294 वोटों से आगे थे. लेकिन पहली पसंद के वोटों से जीत के लिए जरूरी संख्या पूरी नहीं हुई. इसके बाद दूसरी पसंद के वोटों की गिनती की गई. निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले की मतपत्रिकाओं पर दर्ज दूसरी पसंद के वोटों से अभिजीत वंजारी को फायदा मिला.

अंतिम नतीजे में अभिजीत वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि सुधाकर कोहले को 63,960 वोट मिले. इस तरह वंजारी ने 3,271 वोटों से जीत हासिल की. नागपुर में कांग्रेस की यह लगातार दूसरी जीत है. बीजेपी के लिए यह नतीजा इसलिए अहम है, क्योंकि नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है.

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बीजेपी के लिए राजनीतिक संदेश बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने के बावजूद बीजेपी को जीत नहीं मिली. निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले ने भी चुनाव के बाद कहा कि अगर उन्हें किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक टिकट मिला होता, तो नतीजा अलग हो सकता था. हालांकि, यह उनका अपना दावा है. अंतिम नतीजे में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी विजयी रहे.

नागपुर का नतीजा बताता है कि पहली पसंद के वोटों में आगे रहने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार चुनाव भी जीत जाएगा. दूसरी पसंद के वोटों की गिनती के बाद अंतिम नतीजा बदल सकता है.

पांच सीटों के नतीजों से क्या संदेश मिला?

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में महाविकास आघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटों पर जीत मिली. कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट पर अपनी जीत दोहराई. शरदचंद्र पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटें जीतीं. बीजेपी ने पुणे शिक्षक सीट पर जीत हासिल की, जबकि अमरावती शिक्षक सीट एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खाते में गई.

इन नतीजों में अलग-अलग राजनीतिक संदेश सामने आए. नागपुर में कांग्रेस ने बीजेपी को हराया, पुणे स्नातक सीट पर शरद पवार की पार्टी को जीत मिली और मराठवाड़ा में अजित पवार की पार्टी के मौजूदा विधायक को हार का सामना करना पड़ा.

अमरावती में शिंदे की शिवसेना ने जीत दर्ज की, जबकि पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी सफल रही. दूसरी तरफ, महायुति के भीतर उम्मीदवारों को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने दोनों सहयोगी दलों के बीच तालमेल पर चर्चा शुरू कर दी. प्रफुल्ल पटेल की आत्ममंथन की अपील और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने भी इन नतीजों की राजनीतिक अहमियत बढ़ा दी है. कुल मिलाकर, इन पांच सीटों के नतीजे बताते हैं कि चुनाव में सिर्फ पार्टी की ताकत ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार का चयन, स्थानीय मुद्दे, बागी उम्मीदवार और दूसरी पसंद के वोट भी अहम भूमिका निभाते हैं.

विनोद जगदाले
विनोद जगदाले

विनोद जगदाले को 22 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है. वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं. ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और एक्सक्लूसिव खबरें भी सामने लेकर आए. उनकी पहचान निष्पक्ष, बेबाक और जमीनी पत्रकार के तौर पर की जाती है. विनोद जगदाले 10 से ज्यादा सम्मान से सम्मानित और जनहित की आवाज को मजबूती से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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