रेखा के जन्मदिन पर जानिए उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ियों का अनोखा सच. अमिताभ बच्चन के साथ चर्चा भले ज़्यादा रही, लेकिन जीतेंद्र के साथ उन्होंने रिकॉर्ड 26 फिल्में बतौर हीरोइन कीं.
Rekha Birthday: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी नज़ाकत, रहस्य और बेमिसाल अदाकारी का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम जेहन में आता है रेखा का. 10 अक्टूबर 1954 को जन्मी भानुरेखा गणेशन यानी हमारी सदाबहार ‘रेखा’ आज अपना जन्मदिन मना रही हैं. पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में रेखा ने न सिर्फ अपनी अदायगी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि बड़े पर्दे पर कई दिग्गज एक्टर्स के साथ ऐसी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री गढ़ी जो आज भी मिसाल है. जब भी रेखा की किसी जोड़ी की बात होती है, तो लोगों की जुबां पर सबसे पहले अमिताभ बच्चन का नाम आता है. दोनों के रिश्ते और फिल्मों की चर्चा गपशप की गलियों से लेकर सीरियस सिनेमा प्रेमियों तक सभी में खूब होती है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉक्स ऑफिस के आधिकारिक आंकड़े एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली कहानी बयां करते हैं? असलियत यू है कि रेखा ने अपने करियर में अमिताभ से लगभग तीन गुना ज़्यादा फ़िल्में ‘जंपिंग जैक’ यानी सुपरस्टार जीतेंद्र के साथ बतौर हीरोइन की हैं.
अमिताभ बच्चन और रेखा ने यूं तो कुल 10-11 प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया (जिसमें ‘कसमे वादे’ का स्पेशल गाना और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्में शामिल हैं जहां रेखा राजेश खन्ना के अपोजिट थीं), लेकिन बतौर लीड रोमांटिक पेयर रेखा ने बिग बी के साथ कुल 9 फिल्में कीं.
ये रही पूरी लिस्ट:
- ‘दो अनजाने’ (1976)
- ‘आलाप’ (1977)
- ‘राम-बलराम’ (1977)
- ‘खून पसीना’ (1977)
- ‘गंगा की सौगंध’ (1978)
- ‘मुकद्दर का सिकंदर’ (1978)
- ‘मिस्टर नटवरलाल’ (1979)
- ‘सुहाग’ (1979)
- ‘सिलसिला’ (1981)
इस जोड़ी का जादू इतना गहरा था कि पर्दे के बाहर उनके कथित अफ़साने फिल्मों के आंकड़ों से कहीं बड़े बन गए. ‘सिलसिला’ के बाद यह जोड़ी भले ही फिर कभी बड़े पर्दे पर नहीं लौटी, लेकिन आज भी लोग जब रेखा की जोड़ी की बात करते हैं, तो अमिताभ का नाम सबसे पहले लेते हैं.
बॉक्स ऑफिस का असली ‘गोल्डन रिकॉर्ड’
ग्लैमर और गॉसिप से परे अगर सिनेमाई हकीकत को देखें, तो रेखा के करियर की सबसे बड़ी, सबसे लंबी और सबसे सफल ऑन-स्क्रीन पार्टनरशिप एक्टर जीतेंद्र के साथ रही. जीतेंद्र और रेखा ने कुल 30 से अधिक फिल्मों में स्क्रीन साझा की, जिनमें से 26 फिल्मों में रेखा सीधे तौर पर जीतेंद्र की लीड हीरोइन बनीं. 70 के दशक के आखिर से लेकर 80 के पूरे दशक तक निर्देशक और निर्माता इस जोड़ी पर आंख मूंदकर दांव लगाते थे.
‘जुदाई’ (1980), ‘मांग भरो सजना’ (1980), ‘एक ही भूल’ (1981), ‘प्यासा सावन’ (1981), ‘अपना बना लो’ (1982), ‘रास्ते प्यार के’ (1982), ‘तोहफा’ (1984), ‘संजोग’ (1985), ‘सदा सुहागन’ (1986) और ‘सौतन की बेटी’ (1989) जैसी फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर पैसों की बारिश करा दी थी.
फैमिली ड्रामा, पति-पत्नी के उलझे रिश्ते, त्याग और समाज के ताने-बाने पर बनी फिल्मों में जीतेंद्र और रेखा की जोड़ी आम भारतीय परिवारों की पहली पसंद बन गई थी। साउथ के रीमेक वाले दौर में टी. रामा राव और के. बाप्पा जैसे निर्देशकों के लिए यह जोड़ी सफलता की सबसे पक्की गारंटी मानी जाती थी.
चमक-दमक बनाम सिनेमाई रिकॉर्ड
दिलचस्प बात ये है कि मीडिया और पॉप-कल्चर में अमिताभ-रेखा की इंटेंस केमिस्ट्री को जितनी जगह मिली, पारिवारिक दर्शकों के बीच जीतेंद्र-रेखा की जोड़ी उतनी ही सहज और भरोसेमंद बनकर उभरी. रेखा के जन्मदिन पर ये तथ्य उनके करियर की उस महान विविधता को रेखांकित करता है कि वे एक तरफ जहां अमिताभ के साथ संजीदा और ग्लैमरस रोमांस रच सकती थीं, वहीं जीतेंद्र के साथ 26 फिल्मों तक हर घर-आंगन की चहेती गृहिणी या प्रेमिका बनकर दिलों पर राज भी कर सकती थीं.
कहकशा परवीन
टीवी 9 डिजिटल हिंदी में बतौर सब एडिटर काम कर रहीं कहकशा परवीन को मीडिया इंडस्ट्री में 6 साल का अनुभव है. इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है और इलेक्ट्रोनिक मीडिया एंड टीवी प्रोडक्शन में डिप्लोमा किया है. कहकशा ने अपने करियर की शुरुआत बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद नवोदया टाइम्स में मनोरंजन सेक्शन में कंटेंट लिखना और सेलिब्रेटिजी के इंटरव्यू लेती रही हैं. एबीपी नेटवर्क में भी कहकशा बतौर सब एडिटर मनोरंज की खबरें लिखती रही हैं. इन्हें ट्रैवल, फैशन, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में लिखने और पढ़ने का शौक है.
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