Nana Patekar Last Wish: 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का निधन, क्या थी एक्टर की अंतिम इच्छा?
बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया. 75 साल की उम्र में एक्टर का निधन हो गया. कुछ साल पहले ही उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के बारे में बताया था जिसने उनके फैंस को भी भावुक कर दिया था.
Bollywood Actor Nana Patekar Last Wish: बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में नाना पाटेकर ने एक लंबा सफर तय किया. वे लोगों के बीच इतने पॉपुलर होने के बाद भी लाइमलाइट से दूर रहते थे. एक्टर का अपना अलग दर्शन था और वो अपनी शर्तों पर ही जीवन जीते थे. इसकी झलक उनके फिल्मी करियर के दौरान भी देखने को मिली. वे अपनी शर्तों पर काम करते. अपनी शर्तों पर फीस लेते. और इंडस्ट्री में कई लोगों से अच्छे संपर्क के बाद भी अपनी निजी जीवन को अलग रखते थे. शहर की चकाचौंध से दूर, शोहरत और कामियाबी से परे, एक बेहद साधारण जीवन जीते थे. गांव में किसानों के बीच रहते थे और वहीं उनकी असली पहचान थी.
मगर अफसोस की बात तो ये है कि अंतिम समय में वे अपनी पसंदीदा जगह और लोगों के बीच नहीं थे. गोवा स्थित डोना पाउला में उनका एक घर था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. एक्टर ने एक दफा अपनी अंतिम इच्छा के बारे में भी बात की थी. आइए जानते हैं कि आखिर नाना पाटेकर की आखिरी इच्छा क्या थी.
क्या थी नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा?
नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार पुणे के डोनजे गांव स्थित उनके खेत में ही किया जाए. दरअसल नाना पाटेकर के तीन घर थे. एक घर मुंबई में था एक गोवा में था और एक फार्महाउस पुणे के खड़कवासला में था. इसकी के पास स्थित गांव डोनजे में उनके खेत थे जहां वे खेती-किसानी किया करते थे. वे सुकून के पल बिताने के लिए यहीं आते थे और उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब वे मर जाएं तो उनका अंतिम संस्कार यहीं किया जाए. उनके घर-परिवार में सभी लोगों का निधन हो गया था. सिर्फ उनकी पत्नी और बेटे ही थे. उनके भाई बहन, माता-पिता सभी गुजर गए थे. इस बात से नाना काफी दुखी रहते थे और उनका ये दर्द लोगों के सामने भी छलकता था.
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खुद के लिए 12 मन लकड़ियां इकट्ठा की थीं…
नाना पाटेकर किस सोच-विचार के आदमी थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने ही निधन के लिए पहले से ही 12 मन लकड़ियां इकट्ठा कर के रखी थीं. उन्होंने एक इंटरव्यू में इस बारे में बताया था. एक्टर ने कहा था कि वे चाहते हैं कि उनका अंतिम संस्कार जब हो तब कोई दुखी ना रहे. उन्हें सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए. उन्होंने इसलिए ही सूखी लकड़ियां इकट्ठा की थीं. उनका ऐसा मानना था कि गीली लकड़ियों में उन्हें नहीं जलाया जाए. क्योंकि गीली लकड़ियों से जो धुआं उठेगा उससे उनकी चिता के पास आए उनके दोस्तों की आंखों में पानी आएगा. वो ऐसा नहीं चाहते थे.




