Suryaa Sunny Deol: सिगरेट का धुआं उड़ाते दिखे सनी देओल, स्मोकिंग सेहत के लिए हानिकारक तो फिल्मी पर्दे पर टशन क्यों?

Suryaa Sunny Deol: सिगरेट का धुआं उड़ाते दिखे सनी देओल, स्मोकिंग सेहत के लिए हानिकारक तो फिल्मी पर्दे पर टशन क्यों?

सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक है तो फिल्मी पर्दे पर किरदारों को कितना धुआं उड़ाते हुए दिखाना उचित है? टॉक्सिक में धुएं की भरमार हम देख चुके हैं. अब सनी देओल की सूर्या के पोस्टर का प्रचार भी देखिए.

Sunny Deol Suryaa poster: सनी देओल को आमतौर पर फिल्मी पर्दे पर शायद ही सिगरेट या सिगार पीते देखा गया है लेकिन अब ही सूर्या (Suryaa) के पोस्टर पर एक अलग लुक में नजर आए हैं. चेहरे पर गहरा अवसाद और सिरगेट का धुआं. अपने अतीत के रहस्यों की तलाश में जुटा एक बुजुर्ग इंसान. जाहिर है सनी का नया लुक चर्चा में आना ही था. एक एक्शन हीरो का इतना इंटेंस लुक पहले कभी नहीं देखा गया. सनी के इस लुक में फिल्म की कहानी और उनके किरदार के भी कयास लगाए जा रहे हैं. आपको बताएं कि सूर्या के निर्देशक हैं- एम पद्म कुमार और निर्माता हैं- कमल मुकुट, जिन्होंने इससे पहले सनी के साथ गदर 2 भी प्रोड्यूस की थी.

गौरतलब है कि सनी ने हाल की फिल्मों में अपनी पुरानी छवियों को बखूबी तोड़ा है. उन्होंने साबित किया है कि वह बॉर्डर या गदर में गरजने और मुक्का बरसाने वाले एक्टर नहीं बल्कि गहरी संवेदना जताने वाले कलाकार भी हैं. इक्का और बंटवारा 1947 जैसी फिल्मों से उन्होंने नई छवि बनाने की कोशिश की है. इन फिल्मों की व्यावसायिक सफलता बहस का अलग विषय हो सकता है लेकिन सनी इन किरदारों में सनी की अदायगी को पसंद किया गया है.

नई छवि बनाने की अगली कड़ी

12 अक्टूबर को जब सूर्या के मोशन पोस्टर पर उन्हें सिगरेट का धुआं उड़ाते देखा गया तो इसे नई छवि बनाने की अगली कड़ी के तौर पर ही समझा जा रहा है. लेकिन नई छवि बनाने की कोशिश का असर उनके फैन्स के परसेप्शन भी पड़ेगा- शायद इस तरफ उन्होंने गौर नहीं किया. जानकारी के मुताबिक सूर्या एक क्राइम थ्रिलर है. इसे मलयालम की ‘जोसेफ’ का रीमेक बताया गया है जो कि साल 2018 की एक ब्लॉकबस्टर मूवी है. एम पद्म कुमार के निर्देशन में बनी ‘जोसेफ’ में जोजू जॉर्ज का अभिनय काफी पसंद किया गया था. दोनों फिल्मों का पोस्टर भी एक समान दिखता है.

सूर्या जब 20 नवंबर को रिलीज होगी तब इसकी कहानी का खुलासा होगा और यह भी जाहिर होगा कि सनी देओल ने अपने नए लुक के साथ कितना न्याय किया है और अपने फैन्स को कितना प्रभावित किया है. लेकिन फिलहाल अहम सवाल ये है कि हाल के समय में फिल्मों में धूम्रपान या फिर फिल्म जगत की नामचीन हस्तियों द्वारा विज्ञापनों में अल्कोहल के प्रचार-प्रसार को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है तो क्या सनी देओल जैसे एक जिम्मेदार और वरिष्ठ अभिनेता को भी अपने सिगरेट पीते इतने खतरनाक लुक को लेकर संजीदा नहीं होना चाहिए?

सूर्या से पहले रामायण आ चुकी होगी

अब सनी की आने वाली फिल्मों की सूची पर भी एक नजर डालें. सूर्या 20 नवंबर को सिनेमा घरों में रिलीज होगी जबकि उससे करीब दो हफ्ते पहले नमित मलहोत्रा की रामायण में सनी देओल हनुमान बनकर दिवाली के मौके पर 5 नवंबर को नजर आ चुके होंगे. पर्दे पर जयश्री राम बोलेंगे और रावण की लंका जलाएंगे.

वैसे ये तर्क बिल्कुल वाजिब है कि एक कलाकार सभी तरह की भूमिकाएं करने के लिए स्वतंत्र होता है, कलाकारों को उनके किरदारों की छवि से बांधकर नहीं रखा जाना चाहिए लेकिन यह भी सही है कि सनी देओल की अपनी फैन फोलोइंग है- उम्दा अभिनय के बावजूद बंटवारा 1947 में शांति और भाईचारा कायम करने वाले उनके किरदार के मिजाज को उनके फैन्स ने खारिज कर दिया था.

Smoking Scene In Movies

(सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है)

तर्क से परे टॉक्सिक में सिगरेट-सिगार सीन

सवाल ये भी है कि हाल ही आई टॉक्सिक यश के सुपर एक्शन और बेवजह खून-खराबे के सीन के साथ-साथ जिस चीज़ के लिए ट्रोल हुई थी, वह था- यश का सिगरेट और सिगार पीने का धाराप्रवाह सिलसिला. पूरी फिल्म में यश में पर्दे पर कितनी सिगरेट और सिगार पीकर धुआं उड़ा दिया और ऐसा किसलिए किया- ये भी समझ ही नहीं बल्कि तर्क से भी परे था. पूरी फिल्म के दौरान स्क्रीन पर बार-बार यह लिखा आता रहा- स्मोकिंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. संकेत तो यहां तक जा रहा था कि पूरी फिल्म ही सेहत के लिए हानिकारक है.

पहले विलेन या रईस किरदार पीते थे सिगरेट-सिगार

गौरतलब है कि फिल्मी पर्दे पर कलाकारों द्वारा सिगरेट का छल्ला उड़ाने का चलन सालों पुराना है. गुजरे ज़माने की फिल्मों के दौर से ही ऐसा देखा गया है. लेकिन तब एक फर्क था. पहले केएन सिंह, प्राण, जीवन, सुजीत कुमार या फिर प्रेम चोपड़ा और रंजीत जब पर्दे पर विलेन का किरदार निभाते थे तब क्रूरता और दबंगई को स्टैबलिश करने के लिए उनके हाथों में डायरेक्टर सिगरेट या सिगार थमाते थे. ताकि वे दर्शकों को उन्हें बतौर खलनायक पहचानने में देरी ना हो. यहां तक कि किरदार अगर रईस है तो उसका सिगरेट, सिगार या शराब पीना उतना ही जरूरी था. अशोक कुमार भी खूब सिगरेट-सिगार पीते देखे गए हैं.

हालांकि तब भी राज कपूर या दिलीप कुमार पर्दे पर सिगरेट थामे कम देखे गए हैं लेकिन अवसादग्रस्त या किसी गहन खोजी अभियान में संलग्न किरदार में देव आनंद और गुरु दत्त सिगरेट पीते देखे गए थे. सत्तर के दशक के बाद यह चलन तेजी से बदला. पहले हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शत्रुघ्न सिन्हा और फिर दक्षिण में रजनीकांत ने सिगरेट पीने के अंदाज को भव्य बना दिया. शत्रुघ्न सिन्हा का सिगरेट का छल्लेदार धुआं टशन बन गया तो रजनीकांत ने हवा में उछालकर माचिस के बदले पिस्तौल से सिगरेट जलाई. दोनों के अंदाज बहुत लोकप्रिय हुए.

यह भी पढ़ें : आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने नाना का असली भौकाल तो डायलॉग डिलीवरी में था

एंटी हीरो किरदारों में सिगरेट का चलन बढ़ा

गौर करें तो फिल्मी कहानियों में जब से एंटी हीरो किरदारों का चलन बढ़ा तब से सिगरेट स्टाइल का प्रतीक बन गया. कौन हीरो कितनी और किस स्टाइल में सिगरेट पीता है- यह हिट गॉसिप बन गया. इसी क्रम में हाल के सालों में हमने जिन हीरो को सिगरेट-सिगार के दम पर अपने किरदारों को चमकाते देखा है- उनमें रणबीर कपूर की एनिमल, रणवीर सिंह, संजय दत्त की धुरंधर, टॉक्सिक में यश तो लव एंड वॉर के पोस्टर पर विकी कौशल हैं. और ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर हैं. लव एंड वॉर जनवरी, 2027 में आने वाली हैं.

पर्दे पर हीरो कितनी सिगरेट या सिगार पीते दिखे?

सवाल अहम ये हो जाता है कि सिगरेट पीना अगर सेहत के लिए हानिकारक है तो फिल्मी पर्दे पर किरदारों को कितनी सिगरेट-सिगार पीते हुए दिखाना भी मनोरंजन के लिए हानिकारक नहीं होगा. सबसे हाल में टॉक्सिक में हम इसकी भरमार देख चुके हैं. इस वजह से टॉक्सिक और यश की जबरदस्त आलोचना भी हुई है. अब आने वाली फिल्म सूर्या के पोस्टर का प्रचार भी सनी देओल को धुआं उड़ाते दिखाकर किया जा रहा है.

क्या यह भी तय नहीं होना चाहिए करीब तीन घंटे की फिल्म में कोई किरदार आखिर कितनी देर तक सिगरेट या सिगार पीते हुए दिखे. ताकि किरदार भी स्टैबलिश हो जाए और दर्शकों के मिजाज के साथ भी ज्यादती ना हो.

यह भी पढ़ें :झूठ की विजय और सत्य पराजित! एंटी हीरो बन अजय देवगन ने कैसे जीता दिल! The End कैसा लगा?

संजीव श्रीवास्तव
संजीव श्रीवास्तव

बेस्ट फिल्म क्रिटिक स्वर्ण कमल, 72वां नेशनल अवॉर्ड विजेता. महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों नेशनल अवॉर्ड मिला तो यकीन हुआ कि एक दिन अंधेरा छंटता है और सूरज निकलता है. श्रद्धेय अटल जी यह लिखकर प्रेरणा शक्ति जगा गए थे. साहिर साहब ने भी लिखा था न- वो सुबह कभी तो आएगी. करीब तीन दशक की पत्रकारिता और लेखन के दौरान रोलर-कोस्टर का आरोह-अवरोह जैसे लाइफ पार्टनर ही बन गया. जीवन साथी को इस बात का गर्व है कि मुझे शराब की लत नहीं लेकिन सिनेमा का नशा ईर्ष्या की वजह बनता रहा. पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी जिले का रिखौली गांव-जहां तब बिजली नहीं थी- टीवी सीरियल शहर के रिश्तेदारों के घर जाकर देखता था. कहते हैं- गेंद पर जितना दबाव डालो वह उतनी उछलती है. अब आंखों के आगे रेड कार्पेट की चकाचौंध भी होती है. तमन्ना लेक्चरॉर बनने की थी लेकिन फिल्मों का प्रोफेसर प्यारेलाल बन गया. रिखौली से निकलकर पहले भोपाल, फिर दिल्ली और मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय रहा. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक में कलम को हथियार बनाकर चलाया- मानों मेरे भीतर रूस Vs यूक्रेन का युद्ध हो रहा हो. दफ्तर की जरूरतें और खुद की ख्वाहिशों का विस्तार- दोनों का तालमेल रूस बनाम यूक्रेन का युद्ध ही तो है. सिनेमा-संगीत समेत देश-विदेश की राजनीति, लिटरेचर, क्राइम आदि विविध विषयों (स्पोर्ट्स छोड़कर) पर बेबाकी से लिखा. आसानी से समझ आने वाली और दिल के रास्ते दिमाग तक पहुंचने वाली भाषा लिखना पसंद है. सही विचार वही जो समाज सापेक्ष, देश हित में वंचितों के न्याय का पक्षधर हो. फिल्मों पर अब तक तीन किताबें (कुछ पर काम जारी), दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिखे. शुरुआत प्रिंट मीडिया में सब-एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब चौदह साल गुजारा- जहां चुनाव-बजट, प्राइम टाइम स्पेशल/सिनेमा शोज प्रोड्यूस किए और मुंबई में एंटरटेंमेंट की रिपोर्टिंग भी की. अनेक फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ हुए. लाइमलाइट को करीब से देखा. फिर दिल्ली- जहां सूर्या समाचार, कोविड के दौरान एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 भारतवर्ष से सम्बद्ध. नेशनल अवॉर्ड मानो जीवन का गेट-वे है, जो आगे कौन-सी दिशा दिखाता है, इसका इंतजार है.

Read More